स्वदेशी को लेकर चलेगा राष्ट्रीय अभियान

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( नई दिल्ली )05सितम्बर,2025.

राष्ट्रव्यापी इस अभियान की शुरुआत 15-16 सितंबर से नागपुर से होगी। नागपुर में एक बड़े कार्यक्रम के जरिए पूरे देश के व्यापारियों को यह संदेश दिया जाएगा कि जिन क्षेत्रों में भारत की पूर्ण निर्भरता है, उन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी उत्पाद की बिक्री, खरीद और उपयोग नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से देश के सभी व्यापारियों और आम लोगों से स्वदेशी अपनाने की अपील की थी। बाद में भी उन्होंने बार-बार विभिन्न मंचों से इस मांग को दोहराया है। अमेरिका द्वारा भारी टैरिफ लगाने के बाद भी आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों की यही राय थी कि यदि भारत अपने आंतरिक बाजार को मजबूत कर ले तो अमेरिकी टैरिफ से अच्छी तरीके से निपटा जा सकता है। देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों ने घोषणा की है कि वे एक साथ एक मंच पर आकर स्वदेशी के लिए अभियान चलाएंगे। इसमें लोगों से स्वदेशी सामान को खरीदने, बेचने और अपनाने की अपील की जाएगी। यह अभियान स्वदेशी जागरण मंच और व्यापारियों के संगठन कैट के माध्यम से चलाया जाएगा।

अभियान की शुरुआत 15-16 सितंबर से
इस अभियान की शुरुआत 15-16 सितंबर से नागपुर से होगी। नागपुर में एक बड़े कार्यक्रम के जरिए पूरे देश के व्यापारियों को यह संदेश दिया जाएगा कि जिन क्षेत्रों में भारत की पूर्ण निर्भरता है, उन क्षेत्रों में किसी भी विदेशी उत्पाद की बिक्री, खरीद और उपयोग नहीं किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की आत्मनिर्भरता नहीं है, वहां भी विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करने के बारे में नीति बनाई जाएगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT), स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, हॉकर्स जॉइंट एक्शन कमेटी एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता मोर्चा इस मुहिम के सबसे प्रमुख हिस्सेदार होंगे। इन संगठनों के माध्यम से पूरे देश के छोटे-छोटे संगठनों को एक साथ लाने की कोशिश की जाएगी। संगठन आम नागरिकों को भी स्वदेशी के लाभ के बारे में बताने का काम करेंगे।

‘एक दुकान, दस ग्राहक’
व्यापारी नेता सुमित अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि छोटे-छोटे दुकानदारों के ग्राहकों से व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध होते हैं। ये दुकानदार ऐसे ग्राहकों को केवल सामान नहीं बेचते, बल्कि उनके दुख-सुख में उनके साथ खड़े रहते हैं। ये दुकानदार ही उनके असली एजेंट होंगे। ये अपने ग्राहकों को बताएंगे कि किस तरह स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर न केवल वे बचत करेंगे, बल्कि अपने देश के व्यापारियों और उत्पादक भाइयों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक आजादी हासिल करनी है तो देश के 140 करोड़ लोगों के बीच स्वदेशी को एक जनांदोलन बनाना होगा।

10 करोड़ से अधिक व्यापारी, 82 लाख करोड़ रुपये का व्यापार
देशभर में 10 करोड़ से अधिक व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे रिटेल व्यवसायी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 82 लाख करोड़ रुपये के व्यापार से जुड़े हैं। आने वाले 10 वर्षों में यह आंकड़ा 190 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। देश में काम कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस लाभ को आम दुकानदारों से छीनकर अपने झोले में भरने का काम कर रही हैं। लेकिन अब स्वदेशी आंदोलन से इस लाभ को देश के आम उपभोक्ताओं-दुकानदारों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि छोटे खुदरा दुकानदारों के बाद रेहड़ी-पटरी वाले दूसरे ऐसे वर्ग होते हैं जो देश की आम जनता से सीधे संपर्क में होते हैं। देश में ऐसे खुदरा दुकानदारों की संख्या करोड़ों में है। स्वदेशी आंदोलन में इन रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों को भी अपनी ताकत बनाया जाएगा और उनके माध्यम से पूरे देश में स्वदेशी को आंदोलन बनाया जाएगा(साभार एजेंसी)

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