(नई दिल्ली )21सितम्बर,2025.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भावनगर में 34,200 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया।इस दौरान प्रधानमंत्री ने ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित किया और 17 सितंबर को उन्हें भेजी गई जन्मदिवस की शुभकामनाओं का आभार व्यक्त किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “अगर भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे आत्मनिर्भर बनना ही होगा, आत्मनिर्भरता का कोई विकल्प नहीं है और सभी 140 करोड़ नागरिकों को एक ही संकल्प के लिए प्रतिबद्ध होना होगा – चाहे वह चिप्स हों या शिप, वे भारत में ही बनने चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ भारत का समुद्री क्षेत्र अब अगली पीढ़ी के सुधारों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने घोषणा की कि देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों को कई दस्तावेजों और खंडित प्रक्रियाओं से मुक्त कर दिया जाएगा. ‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज’ और ‘एक राष्ट्र, एक बंदरगाह’ प्रक्रिया के कार्यान्वयन से व्यापार और वाणिज्य सरल हो जाएगा।
‘पुराने कानूनों में संशोधन’
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि हाल के मानसून सत्र के दौरान औपनिवेशिक काल के कई पुराने कानूनों में संशोधन किया गया. उन्होंने बताया कि समुद्री क्षेत्र में कई सुधार शुरू किए गए हैं और पांच समुद्री कानूनों को नए रूप में पेश किया गया है। ये कानून शिपिंग और बंदरगाह प्रशासन में बड़े बदलाव लाएंगे।
‘जहाज बनाने में माहिर भारत’
भारत सदियों से बड़े जहाज बनाने में माहिर रहा है इस बात पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के सुधार इस विस्मृत विरासत को पुनर्जीवित करने में सहायता करेंगे. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले एक दशक में 40 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गई हैं, और एक-दो को छोड़कर, सभी भारत में ही निर्मित हुई हैं.
घरेलू स्तर पर आईएनएस विक्रांत का निर्माण
उन्होंने बताया कि विशाल आईएनएस विक्रांत का निर्माण भी घरेलू स्तर पर किया गया था, जिसमें इसके निर्माण में इस्तेमाल किया गया उच्च-गुणवत्ता वाला स्टील भी शामिल है. भारत में क्षमता है और कौशल की कोई कमी नहीं है. उन्होंने राष्ट्र को आश्वस्त किया कि बड़े जहाज़ बनाने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूती से मौजूद है.
70,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत को एक प्रमुख समुद्री शक्ति बनाने के लिए सरकार तीन प्रमुख योजनाओं पर काम कर रही है. इनसे जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता आसान होगी, शिपयार्ड आधुनिक तकनीक अपनाने में सक्षम होंगे और डिज़ाइन एवं गुणवत्ता मानकों में सुधार होगा. उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इन योजनाओं में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा.(साभार एजेंसी)
