(लखनऊ,UP)06दिसंबर,2025.
पराली की आग में पश्चिमी उत्तर प्रदेश धधक रहा है। पूर्वांचल के 10 जिलों में बीते दो महीने में जहां एक भी घटना दर्ज नहीं थीं, वहीं बीते दस दिनों में तीन गुना पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। सेटेलाइट से की गई निगरानी में बीते दस दिनों में 327 घटनाएं सामने आई हैं। चंदौली जहां बीते पांच साल में एक भी पराली जलाने की घटना नहीं हुई थी, वहां भी पराली जलाने के 23 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, वाराणसी में पराली जलाने की घटना पूरे प्रदेश में सबसे कम हैं। यहां चार मामले सामने आए हैं। जबकि पूर्वांचल में सबसे ज्यादा बलिया में 90 और जौनपुर में 70 मामले दर्ज किए गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पर्यावरण संरक्षण के तहत खरीफ सीजन में पराली जलाने पर रोकथाम के लिए पूरे देश में सेटेलाइट से 15 सितंबर से 30 नवंबर तक निगरानी की गई। पराली जलाने की घटनाओं को दर्ज कर अर्थदंड लगाया गया। 20 नवंबर तक पश्चिम के अलावा पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में पराली जलाने के 100 से 800 मामले दर्ज किए गए थे।
वहीं, पूर्वांचल के 10 जिलों में सिर्फ दो माह में 111 मामले मिले थे। इसमें भी चंदौली में शून्य और वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर व सोनभद्र में पराली जलाने के एक से चार मामले सामने आए थे। लेकिन, 20 नवंबर के बाद इसमें तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वाराणसी मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि पूर्वांचल में धान की कटाई अमूमन देर से होती है। इसलिए पराली जलाने के मामले इधर दर्ज किए गए हैं। पूरे यूपी में ढाई माह में पराली जलाने की 7290 घटनाएं हुई हैं, जो पांच साल में सबसे ज्यादा है।
बारिश से बोआई में देरी से बढ़ी घटनाएं
धान की कटाई के दौरान ही मोंथा तूफान और बारिश हो गई थी। उप निदेशक कृषि अमित जायसवाल ने बताया कि खरीफ के बाद रबी की बोआई में कम समय होता है। ऐसे में बारिश से धान की कटाई देर से हुई। इसलिए कुछ किसानों ने जल्दी बोआई कराने के लिए पराली जलाया। इन किसानों पर जुर्माना लगाया गया। पांच से 30 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया गया है।
यूपी में मिर्जापुर व वाराणसी मंडल सबसे कम:
पूरे यूपी में मिर्जापुर में सबसे कम पराली जलाने के मामले हुए हैं। यहां पर मात्र 37 मामले हैं। जबकि वाराणसी मंडल में 140 मामले हैं। जबकि प्रदेश के अन्य मंडलों में गोरखपुर में सबसे ज्यादा हैं।
क्या बोले अधिकारी
बीते साल से घटनाएं कम हुई हैं। किसानों में जागरूकता आई है। हालांकि, कटाई के दौरान बारिश से अंतिम समय में रबी की बोआई में देरी को देखते हुए खेतों को खाली करने के लिए घटनाएं बढ़ी हैं। जिन किसानों ने पराली जलाएं हैं उनपर अर्थदंड की कार्रवाई की गई है। -शैलेंद्र कुमार, संयुक्त कृषि निदेशक, वाराणसी (साभार एजेंसी)
