(नई दिल्ली)8फरवरी,2026
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग- डीएसटी ने स्वच्छ ऊर्जा में भारत और नीदरलैंड के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढाते हुए आज भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फैलोशिप कार्यक्रम आरंभ किया। इस अवसर पर नीदरलैंड के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय तथा 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों- आईआईटी के बीच हरित ऊर्जा और हाइड्रोजन अनुसंधान में सक्षम शैक्षणिक सहयोग ढांचा स्थापित करने के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फैलोशिप कार्यक्रम के आज जारी योजना दिशानिर्देश और प्रस्ताव आह्वान (सीएफपी), राष्ट्रीय क्षमता-निर्माण पहल है जो विभिन्न संस्थानों के योग्य भारतीय डॉक्टरेट, पोस्टडॉक्टरेट और संकाय आवेदकों के लिए खुली है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने भारत में नीदरलैंड के उप राजदूत श्री हुइब मिजनारेंड्स की उपस्थिति में इस फैलोशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
श्री करंदीकर ने कहा कि हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों को अनुसंधान से लेकर स्थापना तक बढ़ाने के लिए केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लक्षित क्षमता-निर्माण पहल महत्वपूर्ण हैं और यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है जहां प्रदूषण कम करना कठिन है। उन्होंने कहा कि यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
नीदरलैंड के उप राजदूत श्री हुइब मिजनारेंड्स ने हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग बढाने पर जोर दिया। ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जौके डी व्रीस ने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने में निरंतर शैक्षणिक साझेदारी की भूमिका पर बल दिया।
भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फैलोशिप कार्यक्रम का उद्देश्य नीदरलैंड्स के उन्नत हाइड्रोजन पारिस्थितिकी प्रणालियों के व्यापक अनुभव द्वारा हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी में भारत की स्थापन तैयारी मजबूत बनाना है। इसमें प्रणाली समेकन, सुरक्षा, तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण, जीवन-काल मूल्यांकन और स्वदेशीकरण के उपायों पर जोर दिया गया है। फैलोशिप का उद्देश्य है कि अनुसंधान के परिणाम राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा प्राथमिकताओं में योगदान दें।
इस अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की मेजबानी में ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 आईआईटी के बीच संस्थान- से-संस्थान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे हाइड्रोजन और हरित ऊर्जा अनुसंधान में दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग के लिए उपयुक्त ढांचा स्थापित हुआ। यह समझौता ज्ञापन संकाय और छात्रों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और ज्ञान साझाकरण को सुगम बनाएगा जिसमें स्वतः वित्तीय प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता नहीं होगी।
यह उच्च स्तरीय संपर्क भारत और नीदरलैंड की हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान, क्षमता निर्माण और स्थापन-उन्मुख नवाचार बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है, जो भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, ऊर्जा स्वतंत्रता 2047 और नेट-जीरो 2070 के उद्देश्यों के अनुरूप है।
आयोजन में आईआईटी गोवा के निदेशक प्रोफेसर धीरेंद्र एस. कट्टी, आईआईटी धारवाड़ के निदेशक प्रोफेसर वेंकप्पय्या आर.देसाई, सीईएसटी प्रभाग प्रमुख डॉ. अनीता गुप्ता, एचवीआईसी के वरिष्ठ निदेशक डॉ. रंजीत कृष्ण पाई, सीईएसटी डीएसटी के एचएफसी कार्यक्रम अधिकारी तथा डीएसटी अन्य आईआईटी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
ये पहल भारत-नीदरलैंड सहयोग और गहन बनाने तथा उभरती वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के लिए कुशल मानव संसाधन बढाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।(साभार एजेंसी)
