(प्रयागराज,UP)16अप्रैल,2026.
आध्यात्मिकता और संस्कृति की वैश्विक पहचान रखने वाली संगम नगरी अब रक्षा क्षेत्र में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ का नया अध्याय लिखेगी। चार से छह मई तक शहर में ‘नार्थ टेक सिम्पोजियम-2026’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इसे ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ का नाम दिया गया है, जहां पहली बार अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, रक्षा उद्योग और सीमा पर तैनात सैनिकों की क्षमताओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। यहां आयोजन न्यू कैंट में होगा।
मुख्य आकर्षण ‘डिफेंस मोबिलिटी’:
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण ‘डिफेंस मोबिलिटी’ का भविष्य है। स्वदेशी तकनीक के दम पर अब भारतीय सेना लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर रेगिस्तान के धोरों तक अपनी रसद और सैन्य आवाजाही को निर्बाध बनाए रखने में सक्षम हो गई है। आयोजन में ऐसी तकनीकों का प्रदर्शन होगा जो कठिनतम भौगोलिक परिस्थितियों में भी हमारे सैनिकों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेंगी।
नए प्रोटोटाइप का प्रदर्शन होगा
रक्षा त्रिवेणी संगम में तीन मुख्य शक्तियां एक मंच पर होंगी। इसमें सेना सीमाओं की रक्षा के व्यावहारिक अनुभव और भविष्य की जरूरतों को साझा करेगी। आइआइटी और प्रमुख शोध संस्थानों के वैज्ञानिक नवाचारों को प्रस्तुत करेंगे। स्टार्टअप और दिग्गज कंपनियां उन आइडियाज को वास्तविक उत्पादों में बदलकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती देंगी। यहां स्वदेशी नवाचार से विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने के लिए तैयार नए प्रोटोटाइप का प्रदर्शन होगा।
प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक क्षमता का संगम दिखेगा
सैन्य मुख्यालयों की मौजूदगी के बीच इस तरह के बड़े आयोजन से शहर की राष्ट्रीय स्तर पर साख बढ़ेगी। सेना, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल के लिए एक ‘सिंगल विंडो’ प्लेटफार्म रणनीतिक मजबूती देगा। रक्षा विभाग के प्रवक्ता विंग कमांडर देबार्थो धर ने बताया कि जिस तरह प्रयागराज में तीन नदियों का संगम होता है। वैसा ही रक्षा त्रिवेणी संगम होगा। जहां प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक क्षमता का संगम देखने को मिलेगा।
प्रेरणा का केंद्र बनेगा यह आयोजन:
स्वदेशी तकनीक आज कठिनतम भौगोलिक परिस्थितियों में भी हमारे सैनिकों और आवश्यक आपूर्ति को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यहां एआइ (कृतिम बुद्धिमत्ता) आधारित सर्विलांस सिस्टम, भारी वजन उठाने वाले लाजिस्टिक ड्रोन और स्वदेशी आर्टिलरी सिस्टम की झलक देखने को मिलेगी। यह आयोजन न केवल रक्षा विशेषज्ञों के लिए, बल्कि भविष्य के वैज्ञानिकों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनेगा। (साभार एजेंसी)
