उप्र के हर जिले में बनेगा बायोगैस मॉडल विलेज

Uttar Pradesh

(लखनऊ,UP)09जुलाई,2026

उत्तर प्रदेश में गोबर अब सिर्फ पशुपालन का उप-उत्पाद नहीं रहेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और ग्रामीण रोजगार का बड़ा माध्यम बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर प्रदेश सरकार हर जिले में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी अभियान में आईआईटी दिल्ली तकनीकी सहयोग देगा, जिससे गांवों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक खेती को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

IIT दिल्ली देगा तकनीकी सहयोग
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के बायोगैस डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम इस अभियान से जुड़ चुकी है। टीम गांवों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रशिक्षण में सहयोग करेगी। इससे आधुनिक तकनीक का लाभ सीधे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

झांसी से शुरुआत,बनेगा प्राकृतिक कृषि ग्राम
इस अभियान की शुरुआत झांसी जिले के ग्राम पलींदा से की गई है, जहां पहले चरण में 18 बायोगैस संयंत्र लगाए गए हैं। लक्ष्य है कि गांव के प्रत्येक घर तक बायोगैस पहुंचे और पूरा गांव प्राकृतिक कृषि मॉडल के रूप में विकसित हो। गोबर से तैयार गैस घरेलू ईंधन का विकल्प बनेगी, जबकि संयंत्र से निकलने वाला स्लरी किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद उपलब्ध कराएगा।

लागत घटेगी,जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि बायोगैस संयंत्रों के विस्तार से रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम होगी। खेतों को बेहतर ऑर्गेनिक खाद मिलेगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और रसायन मुक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे किसानों की लागत घटने और आय बढ़ने की संभावना है।

हर जिले में बनेगा मॉडल विलेज
गो सेवा आयोग के अनुसार अब इस मॉडल को पूरे उत्तर प्रदेश में विस्तार देने की तैयारी है। सरकार प्रत्येक जिले में एक मॉडल गांव विकसित करना चाहती है, जहां गोबर आधारित ऊर्जा, प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और ग्रामीण रोजगार का समेकित मॉडल लागू होगा। यदि यह योजना सफल होती है तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के हजारों गांव इस मॉडल को अपना सकते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल बायोगैस उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती, गो संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य गांवों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और किसानों को टिकाऊ कृषि की ओर ले जाना है(साभार एजेंसी)

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