(लखनऊ,UP)23नवंबर,2025.
देशभर में हो रही साइबर ठगी के तार हरदोई से जुड़ रहे हैं। इसके लिए हरदोई से जारी सिमों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्राथमिक जांच में 99 सिम के जरिये साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है। यह सिम जारी करने वाले शख्स के खिलाफ शहर कोतवाली में फर्जीवाड़े और आईटी एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा सवायजपुर, पिहानी, टड़ियावां और पाली थाना क्षेत्रों के लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किए जाने की भी पुष्टि हुई है।
इसको लेकर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पिछले कुछ वर्षों से साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। कभी झांसा देकर तो कभी व्यवसाय से जोड़ने के नाम पर ठगी की जा रही है। देश भर में हो रही इन घटनाओं में हरदोई जनपद के 99 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर मोबाइल नंबर (सिम) जारी हुए हैं। उनमें से ज्यादातर को पता ही नहीं है कि उनका मोबाइल नंबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
2023 में खरीदे थे सिम
साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए नंबरों की जानकारी मिलने पर रेलवेगंज चौकी प्रभारी विश्वास शर्मा ने इसकी जांच की। इसमें पता चला कि प्वाइंट ऑफ सेल कोड (पॉस कोड) के जरिये एक ही जगह से सिम जारी किए गए हैं। यह पॉस कोड शहर के सिविल लाइन निवासी आशुतोष गुप्ता के नाम से जारी हुआ था। यहां से जारी 99 नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है। कुछ सिमों की जांच की गई तो पता चला कि यह सिम सीतापुर जनपद के मछरेहटा थाना क्षेत्र के रानामऊ गांव निवासी लोगों के हैं। इन सभी ने सिम 2023 में खरीदे थे। आईडी तो इनकी लगी है, लेकिन साइबर ठगों के पास हैं।
आशुतोष गुप्ता के खिलाफ फर्जीवाड़ा की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। टीमें गठित कर साइबर ठगी के गिरोह का खुलासा किया जाएगा। -अंकित मिश्रा, सीओ सिटी
शाहजहांपुर से जारी हुआ था पॉस कोड,ऐसे जारी किए सिम:
पुलिस को विवेचना में पता चला कि आशुतोष गुप्ता को पॉस कोड शाहजहांपुर से जारी हुआ था। ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे सारे सिम बीएसएनएल के ही हैं और वर्ष 2023 में जारी हुए हैं। विवेचना में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 और 24 तक एक बार अंगूठा लगाकर और आधार देकर तीन सिम तक एक साथ जारी किए जाने की व्यवस्था थी। ऐसे में खरीदने के लिए जाने वाले ग्रामीण इलाकों के लोग एक सिम लेकर चले जाते थे लेकिन उनके नाम से दो और सिम जारी हो जाते थे। इन अतिरिक्त सिमों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा है।(साभार एजेंसी)
