हाथरस का गुलाल महकाएगा पूरा देश

UP / Uttarakhand

(लखनऊ,UP)8फरवरी,2026.

होली का पर्व नजदीक आते ही हाथरस के पारंपरिक रंग-गुलाल की खुशबू देश के कोने-कोने तक पहुंचने लगी है। विदेशी बाजारों में भी आपूर्ति की जा रही है। इस साल हाथरस के रंग-गुलाल की मांग में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि हुई है, जिसका बड़ा कारण हर्बल उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता है।

हाथरस जिले में छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 50 उत्पादन इकाइयां हैं। स्थिति यह है कि कुछ समय पहले तक सालाना 120 करोड़ रुपये का यह कारोबार इस बार 260 करोड़ के आंकड़े तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 80 करोड़ रुपये का निर्यात और 180 करोड़ रुपये की घरेलू खपत का अनुमान है। मांग पूरी करने के लिए करीब 800 कर्मचारी रात-दिन गुलाल बनाने में जुटे हैं।

दरअसल, हाथरस के रंग-गुलाल को उसकी चमक, शुद्धता और सुरक्षित निर्माण प्रक्रिया के लिए पहचाना जाता है। मलयेशिया, सिंगापुर, दुबई, ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल समेत कई देशों में आपूर्ति हो रही है। कारोबारी बताते हैं कि विदेशी बाजारों के साथ ही स्वदेशी मांग में भी औसतन 20 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है।
गौतमबुद्ध नगर से आए कारोबारी तरुण कुमार अग्रवाल बताते हैं कि हाथरस की गुणवत्ता और परंपरा पर देश-विदेश के ग्राहक भरोसा करते हैं। बदलते समय के साथ उत्पादों में विविधता और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों ने इस पारंपरिक उद्योग को नई पहचान दी है। रायपुर छत्तीसगढ़ से आए विकास जैन ने कहा कि उनके यहां गुलाल का उत्पादन होता है, लेकिन वे हाथरस से ही कारोबार कर रहे हैं, क्योंकि यहां के उत्पादों की मांग रायपुर सिटी के लोगों में प्राथमिकता पर रहती है। उत्पादकों के पास अन्य प्रदेशों से कारोबारियों का पहुंचना शुरू हो गया है। साथ ही विदेश में की जाने वाली आपूर्ति के लिए माल दिल्ली, मुंबई व देश के अन्य प्रदेशों में भेजा जा जा रहा है। ऐसे में कारोबारियों ने बताया कि गुलाल के पांच से 20 किलो तक के सिलिंडर, स्प्रे और विभिन्न वैरायटी के पैक इस बार खास आकर्षण हैं।

शहर की एक फैक्टरी में बिक्री के लिए रखे गुलाल के सिलिंडरकुछ सिलिंडरों की कीमत पांच हजार रुपये तक है। हर्बल गुलाल में फ्लावर बेस, फ्रूट बेस, स्टार्च और प्रीमियम श्रेणी की मांग सबसे अधिक है। गुजरात से पक्के रंग मंगाकर उन्हें यहां प्रोसेस किया जाता है और गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में तैयार किया जाता है। इसके अलावा कॉरपोरेट ऑर्डर के तहत गिफ्ट हैम्पर्स की भी मांग बढ़ी है, जिनमें रंग-गुलाल के साथ स्प्रे, पिचकारी, गुब्बारे, टेसू के फूल, चंदन और ठंडाई शामिल हैं।

इस साल कारोबार काफी बेहतर है। कई नए उत्पादों के कारण अच्छी बिकवाली हो रही है। हम लोग दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों तक अपना माल भेज रहे हैं।-देवेंद्र गोयल, रंग-गुलाल निर्माता
लंबी दूरी के ऑर्डर पर माल रवाना कर दिया गया है। आसपास के प्रदेशों से आकर व्यापारी बुकिंग करा रहे हैं। इस साल कारोबार ठीक-ठाक रहने की उम्मीद है।-अशोक कुमार वार्ष्णेय, रंग-गुलाल निर्माता

कई प्रकार के उत्पादों ने बढ़ाई मांग
जिले में पहले कुछ एक प्रकार के ही गुलाल तैयार होते थे, लेकिन अब गुलाल की कई वैरायटी तैयार होती हैं। हर एक वैरायटी में कई रंगों के गुलाल शामिल होते हैं। इसमें सबसे अधिक बिकने वाली हर्बल क्वालिटी है। इसमें बाद फ्लावर बेस, फ्रूट बेस, स्टॉर्च, प्रीमियत आदि शामिल किए जाते हैं। कई कारोबारी अपनी अलग क्वालिटी तैयार करते हैं, जिन्हें बृजवासी, स्पर्श गोविंदा आदि कई प्रकार के नाम दिए जाते हैं। हर एक क्वालिटी में छह से दस प्रकार के रंगों वाला गुलाल शामिल हो सकता है।

गुलाल के सिलिंडर व अन्य उत्पादों से बढ़ा टर्नओवर
समय के साथ रंग-गुलाल के कारोबार में भी आधुनिकता आई है। इसने ही इस कारोबार के टर्नओवर को बढ़ा दिया है। इसमें होली के सामूहिक रूप से खेले जाने की बढ़ती परंपरा का अहम योगदान है। इसके चलते गुलाल के सिलिंडर का उत्पादन हाथरस में तेज हुआ है। पांच किलो से लेकर 20 किलो गुलाल वाले सिलिंडर हाथरस में तैयार हो रहे हैं, जिनके दाम पांच हजार रुपये तक हैं। इसके अलावा रंग व गुलाल के स्प्रे की भी इस साल अच्छी मांग है, जो टर्नओवर को बढ़ाने का काम कर रहा है।

यह भी जानें:
260 करोड़ रुपये का है रंग-गुलाल का सालाना टर्नओवर।
15 बड़ी रंग गुलाल की हैं जनपद में इकाइयां।
35 छोटी रंग-गुलाल की हैं जनपद में इकाइयां।
800 कर्मचारी जुड़े हैं रंग-गुलाल के कारोबार में।(साभार एजेंसी)

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