केशव मौर्य ने किया 32 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण

UP / Uttarakhand

(लखनऊ,UP)24मई,2026.

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को मोहनलालगंज के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए केन्द्रीय वित्त आयोग एवं पंचम वित्त आयोग द्वारा निर्मित 32 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 3 करोड़ रुपये है। इन विकास कार्यों में सी.सी. रोड निर्माण, खड़ंजा निर्माण व मरम्मत, इंटरलॉकिंग, नाला-नाली निर्माण, आर.ओ. वाटर प्लांट स्थापना, तालाब निर्माण और पंचायत भवनों के साथ-साथ विकासखण्ड परिसर के भवनों की मरम्मत व पुताई का काम शामिल है।

यह परियोजनाएं मुख्य रूप से ग्राम पंचायत सिसेंडी, दयालपुर, हसनपुर, रायभान खेड़ा, परसपुरठ्ठा, गौतम खेड़ा, नन्दौली, सलेमपुर अचाका, रघुनाथ खेड़ा, धतौनी, डलौना, उतरावां और कुशमौरा में क्रियान्वित की गई हैं। इन कार्यों के पूरा होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन, स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
डबल इंजन सरकार का मिलेगा लाभ

लोकार्पण के अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार गांवों को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क, पेयजल और बुनियादी ढांचे के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और सुशासन के संकल्प को धरातल पर उतारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जलदूत ऐप’ से होगा प्री-मानसून भूजल स्तर का सर्वेक्षण
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता की स्थिति जांचने, जलस्तर में गिरावट को रोकने और संभावित जल संकट की पहचान के लिए उच्च अधिकारियों को सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्री-मानसून 2026 के अंतर्गत भूजल स्तर का आकलन “जलदूत ऐप” के माध्यम से किया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह विशेष अभियान 25 मई से 15 जून 2026 तक संचालित होगा।

इस अभियान के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों (श्रम रोजगार) को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में चयनित कुओं का भूजल स्तर वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप मापा जाए और आंकड़े जलदूत ऐप पर अपलोड किए जाएं। मापन के दौरान मेजरिंग टेप का उपयोग और फोटो प्रलेखन अनिवार्य होगा, साथ ही एक ग्राम पंचायत के सभी कुओं का डेटा एक ही दिन में संकलित किया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी एस प्रियदर्शी ने बताया कि ऐप के माध्यम से एकत्र आंकड़े भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना बनाने, वर्षा जल संचयन और संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान करने में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।(साभार एजेंसी)

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