(प्रयागराज,UP)07जून,2026.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम प्रधानों को छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस व्यवस्था के कारण ग्राम पंचायत चुनावों को टाला जा रहा है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्र युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान यह तकनीकी आपत्ति उठाई गई कि याचिका में जिस कानूनी प्रावधान के तहत अध्यादेश को जारी किया किया है, उसे चुनौती नहीं दी गई है। इस पर याचियों ने संशोधन के लिए समय मांगा। अदालत ने उन्हें एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की है।
याचियों ने कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायतों में समयबद्ध और नियमित चुनाव अनिवार्य हैं। उनका कहना है कि सरकार ने चुनाव टालने के लिए अपरिहार्य परिस्थितियों और जनहित जैसे अस्पष्ट आधारों का सहारा लिया है। याचिका में ग्राम पंचायतों की लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की शीघ्र बहाली की भी मांग की गई है।(साभार एजेंसी)
