(चंडीगढ़,हरियाणा)11जून,2026.
हरियाणा में 645 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के गबन केस की जांच में नए खुलासे हो रहे हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इतनी बड़ी राशि को ठिकाने लगाने के लिए शेल कंपनी बनाई। इसके बाद कई ज्वैलर्स से संपर्क किया गया, जिन्होंने बैंकिंग ट्रांजैक्शन के बदले आरोपियों को कैश दिया था। ईडी के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी मामले में चल रही जांच के सिलसिले में, प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत हरियाणा के डायरेक्टर, डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिस में तत्कालीन सुपरिटेंडेंट रहे नरेश कुमार को गिरफ़्तार किया है।
सरकारी अफसरों से मिलकर किया फंड का गबन:
ईडी की अब तक हुई जांच से पता चला है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मौजूद हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ यूटी एडमिनिस्ट्रेशन व पंचकूला के दो प्राइवेट स्कूलों के बैंक अकाउंट्स से 645 करोड़ रुपये के सरकारी फंड का गबन किया गया। विक्रम वाधवा मुख्य आरोपियों में से एक है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी फंड का गबन किया। आरोप है कि नरेश कुमार को सीधे मेसर्ज स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट से फंड मिला, जो एक शेल कंपनी थी। इसके जरिए सरकारी पैसे का गबन किया गया था।
परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में 1.20 करोड़:
जांच में यह भी पता चला है कि अपने बैंक अकाउंट्स में सीधे सरकारी फंड लेने के अलावा, नरेश कुमार ने फंड को इधर-उधर करने में एक अहम बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने कैश के रूप में हुई अपराध की कमाई को हासिल करने और छिपाने में सक्रिय भूमिका निभाई। नरेश कुमार अपराध की कमाई को बनाने, उसकी लेयरिंग करने और उसे छिपाने में शामिल रहा है। उसे खुद के और परिवार के सदस्यों के बैंक अकाउंट्स में 1.20 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई मिली। इसके अलावा, इनके खाते में गबन किए गए फंड से भारी मात्रा में कैश पहुंचाया गया था।
इन शेल कंपनियों में गया हेराफेरी का पैसा
इस धोखाधड़ी में, कई शेल कंपनियों (जैसे M/s Capco Fintech Services, M/s Swastik Desh Projects, R.S. Traders, M/s SRR Planning Gurus Pvt Ltd आदि) को सरकारी विभागों के अलग-अलग अकाउंट से सीधे हेराफेरी का पैसा मिला था। इसके बाद, हेराफेरी किए गए पैसे को आरोपियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के अलग-अलग बैंक अकाउंट के ज़रिए घुमाया गया। जांच में पता चला है कि इन शेल कंपनियों से कई ज्वैलर्स को सैकड़ों करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। ज्वैलर्स ने बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन के बदले कैश दिया। रिभव ऋषि और उनके साथियों ने यह कैश नरेश कुमार समेत कई सरकारी अधिकारियों में बांटा। पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने और इससे फायदा उठाने वाले दूसरे लोगों व खरीदी गई संपत्तियों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं।
नरेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद, स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने उसे चार दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है। इससे पहले इस मामले में ईडी ने रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को गिरफ्तार किया था। रिमांड के बाद सभी आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है।(साभार एजेंसी)
