BRICS मंच पर कृषि मंत्री ने रखा भारत का कृषि मॉडल

MP/ Chhatishgarh

(इंदौर,म.प्र.)12जून,2026

मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की दो दिवसीय सम्मेलन का आगाज हो गया है। इस सम्मेलन के शुभारंभ सत्र में बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद्य सुरक्षा के मोर्चे को मजबूत करने के लिए छोटे किसानों को अहम बताया है।

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने वसुधैव कुटुंबकम पर जोर देकर भारत के नजरिए को युद्ध नहीं शांति, संघर्ष नहीं समन्वय पर आधारित बताया।

छोटे किसानों को मौसम-बाजार की चुनौतियों से बचाना है
केंद्रीय कृषि मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए छोटे किसानों को सशक्त बनाने की अहमियत पर बात की।

भारत के मॉडल का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान बोले की भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। सरकार का लक्ष्य इन किसानों को जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से बचाना है। चौहान ने बताया कि किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सीधे उनके खातों में पैसा भेज रही है। इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना जैसी नीतियों के जरिए भी किसानों की मदद की जा रही है।

ब्रिक्स देशों को बताई भारतीय कृषि क्षेत्र की सफलता
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की उपलब्धियों का आंकड़ा पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में देश के कृषि क्षेत्र में औसतन 4.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल खाद्य उत्पादन अब 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इसमें गेहूं का उत्पादन 118 मिलियन टन और बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन के पार हो गया है। वहीं, मछली उत्पादन भी बढ़कर 19 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिससे एक बड़ी आबादी का पेट भर रहा है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय किसानों की कड़ी मेहनत और
प्राकृतिक खेती, महिलाएं और युवा बदल रहे हैं कृषि का स्वरूप
रासायनिक खादों के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्राकृतिक खेती और मिट्टी को बचाने पर जोर दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ का उदाहरण दिया, जिसके जरिए किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाई जा रही है ताकि वे जैविक चीजों का अधिक उपयोग करें।

खेती में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि आज करोड़ों महिलाएं ‘स्वयं सहायता समूहों’ के माध्यम से कृषि से जुड़े काम कर रही हैं। सरकार के अनुसार, गांवों में ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं सामाजिक और तकनीकी बदलाव ला रही हैं। वहीं, नए स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के जरिए युवा भी खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।(साभार एजेंसी)

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