( आगरा,UP)21सितंबर,2025.
देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाना है तो एमएसएमई का महत्व समझना होगा। युवा अब नाैकरी करने वाले नहीं, बल्कि देने वाले बनें। कुछ ऐसी ही विचार एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव आगरा में सामने आए। काॅन्क्लेव का आयोजन डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पाॅलीवाल कैंपस स्थित जुबली सभागार में किया गया। रोजगार सृजन और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मंथन किया गया। एमएसएमई, केंद्र व राज्य वस्तु एवं सेवाकर, जिला व पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ ही उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी।
काॅन्क्लेव का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद मुख्य अतिथि केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि नाै साल की उम्र में पहला पहला राजनीतिक भाषण चौधरी चरण सिंह का सुना था। देश की आत्मा गांव में रहती है। दूसरी पीढ़ी में उनके बेटे को उद्योगपति बनाया गया। तीसरी पीढ़ी वाला एमएसएमई में मंत्री है। स्किल जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पंजाब से आया हूं। हर दूसरा बच्चा कनाडा जाना चाहता है। पिछले दिनों उड़ता पंजाब फिल्म भी आई है।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि खेती की एक सीमा है और उत्पादन की एक सीमा है। जींस पहनने वाली पीढ़ी अब हल नहीं चला रही। एमएसएमई की संभावना क्यों जरूरी है, इस ओर क्यों आना पड़ेगा? इसका कारण बताते हुए कहा कि अब जमीन भाइयों में बंटकर छोटी हो गई है। जमीन अब बढ़ नहीं सकती है। ऐसे में एमएसएमई का महत्व समझना होगा।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या ये है कि हमने सरकारी नौकरी को ही रोजगार मान लिया। बच्चे कभी एमएसएमई नहीं गए। इतनी योजनाएं है कि उनके नाम राजनेताओं को भी नहीं मालूम। उन्होंने कहा कि विदेशियों की किताबें क्यों पढ़ते हो। हमारे पास तो रियल हीरो हैं, जिनकी सफलता की कहानियां पढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोई बड़ा परिवर्तन आ सकता है तो व्यापार से आ सकता है।
प्रो. बघेल ने कहा कि टीटीजेड सिर्फ आगरा के लिए है। एनजीटी ने नुकसान किया है, लेकिन हम पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगरा के कारोबारी सजग हैं, जो जन प्रतिनिधियों से अर्जी लगाते रहते हैं। उन्होंने आजादी के बाद हुए कुछ सबसे बड़े काम भी बताए। उन्होंने कहा कि घर में नल, नल में जल, आयुष्मान कार्ड, गैर-राजपत्रित नौकरियों में इंटरव्यू समाप्त करना सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
काॅन्क्लेव को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग ने कहा कि एमएसएमई से ही हमारा देश सोने की चिड़िया बन सकता है। उन्होंने कहा कि व्यापार में हम हजारों साल टाॅप पर रहे। गांव-गांव में कुछ न कुछ बनता था। व्यापारी इनको इकट्ठा कर विदेश ले जाते थे। इसके बदले में सोना आता था।
विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि वह कभी खुद को कमजोर न समझें। कॅरियर के लिए बहुत सारी फील्ड हैं। वह किसी भी फील्ड को चुन सकते हैं।(साभार एजेंसी)
