भारत-ईयू आइडियाथॉन का आयोजन

National

(नई दिल्ली)
26सितम्बर,2025.

समुद्री प्लास्टिक कचरे का मुकाबला करने पर भारत-ईयू आइडियाथॉन का 25 सितंबर, 2025 को औपचारिक रूप से शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (ओपीएसए) के कार्यालय द्वारा यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रतिनिधिमंडल के साथ साझेदारी में भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी), कार्य समूह 2 के तत्वावधान में हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर आयोजित किया गया था। इस आइडियाथॉन में भारत और यूरोपीय संघ के स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, व्यवसायों और अन्य हितधारकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, ताकि वे समुद्री प्लास्टिक कचरे की समस्या को हल करने के लिए व्यावहारिक के साथ ही अभिनव समाधान विकसित कर सकें।

इस कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता ओपीएसए की वैज्ञानिक सचिव, डॉ.परविंदर मैनी और यूरोपीय आयोग में अनुसंधान और नवाचार के उप महानिदेशक, सुश्री सिग्ने रत्सो ने की। अपने संबोधन में डॉ मैनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह आइडियाथॉन एक ऐसे समाधान विकसित करने का एक संयुक्त प्रयास है जो वैश्विक रूप से प्रासंगिक और स्थानीय रूप से प्रभावी दोनों हैं। उन्होंने कहा, “समुद्री प्लास्टिक कचरे का मुकाबला करने पर आइडियाथॉन वैश्विक रूप से प्रभावशाली समाधान विकसित करने के लिए भारत-ईयू के साझा दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो भारतीय और यूरोपीय दोनों संदर्भों में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या का समाधान करते हैं। अनुसंधान, नवाचार और सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने हाल के वर्षों में भारत के प्रयासों को भी रेखांकित किया, जिसमें ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए एकल- उपयोग प्लास्टिक पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध जैसी पहलें शामिल हैं।

सुश्री रत्सो ने आगे कहा, “ईयू-इंडिया-टीटीसी-डब्ल्यूजी2 आइडियाथॉन ईयू-भारत सहयोग को मजबूत करता है, क्योंकि हम वैश्विक स्थिरता के लिए हमारे साझा दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का सामना करने वाली ताकतों के साथ शामिल होते हैं। यह पहल हमें समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए एक साथ लाती है, जो एक बढ़ता हुआ संकट है जो हमारे क्षेत्रों में समुद्री जीवन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और तटीय अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डालता है।”

कार्यक्रम के दौरान, आइडियाथॉन के लिए तीन चुनौतियों को प्रस्तुत किया गया: (i) तटीय और समुद्री ईकोसिस्टम में उनकी आवाजाही का पता लगाने के लिए समुद्री प्लास्टिक की पहचान और ट्रैकिंग और उनकी निगरानी के लिए अभिनव दृष्टिकोण विकसित करना। (ii) समुद्री प्लास्टिक हटाने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास और इस पर प्रभावी और मापनीय समाधानों पर केंद्रित ध्यान ताकि समुद्री वातावरण में प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सके। (iii) समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाना और समुदायों को संगठित करना व इसमें पारिस्थितिकी प्रणालियों में प्लास्टिक के रिसाव को रोकने के लिए व्यवहार परिवर्तन और समुदाय-नेतृत्व वाली कार्रवाई की भूमिका को उजागर किया जाना।

वैज्ञानिक डी, डॉ. हफसा अहमद, ओपीएसए और यूरोपीय आयोग में अनुसंधान और नवाचार महानिदेशालय के नीति अधिकारी, श्री एंटोनियो मार्केज़ कैमाचो, और भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल के अनुसंधान और नवाचार सलाहकार, श्री किंचित बिहानी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

इस आइडियाथॉन में भारत और यूरोपीय संघ से सत्तर-पचहत्तर से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अधिकारियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, व्यवसायों और नागरिक समाज संगठनों का प्रतिनिधित्व किया।

इस कार्यक्रम में कई विशेषज्ञों ने भी भाग लिया, जिनमें प्रोफेसर ई.वी. रामासामी, प्रोफेसर एमेरिटस, पर्यावरण विज्ञान स्कूल, एम.जी. विश्वविद्यालय, केरल, डॉ. प्रवाकर मिश्रा ,पूर्व वैज्ञानिक ‘जी’, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एमओईएस), डॉ. अजय करमरकर, निदेशक-तकनीकी, कोन्स्पेक इंडस्ट्रीज, डॉ. के. रामू, वैज्ञानिक ‘एफ’, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र, एमओईएस, डॉ. एस.आर. मारिगौदर, वैज्ञानिक ‘ई’, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र, एमओईएस, डॉ. रॉबिन आर.एस., वैज्ञानिक ‘सी’, राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र, सुश्री पिलर ज़ोरज़ो गैलेगो, अध्यक्ष, स्पेनिश समुद्री कचरा संघ, डॉ. वैनेसा-सारा साल्वो समुद्री शोधकर्ता, इंस्टिट्यूट डे सिंसियास डेल मार-सीएसआईसी और डॉ. वेस्ना कुराल्ट परियोजना प्रबंधक, रेमेडीज शामिल थे(साभार एजेंसी)

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