(लखनऊ,UP)18अक्टूबर,2025.
उ.प्र.में धनतेरस, दिवाली,भैयादूज एवं छठपूजा पर पूरे प्रदेश को कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए सभी प्रबंध निदेशकों व अन्य अधिकारियों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं। पॉवर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ आशीष गोयल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। 14 अक्टूबर से पूरे प्रदेश को 24 घंटे कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति दी जा रही है।
सभी क्षेत्रों को कटौती मुक्त बिजली मिल सके इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। वहीं, डिस्कॉम स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। जहां से विद्युत आपूर्ति पर नजर रखी जायेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि अप्रत्याशित ब्रेकडाउन होने की दशा में जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति को चालू करने के लिए पर्याप्त संख्या में मरम्मत गैंगों की व्यवस्था रहे।
एकमुश्त न वसूला जाए मीटर का खर्च
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर निर्देश दिया है कि उपभोक्ताओं का किसी भी स्तर पर शोषण न होने पाए। स्मार्ट मीटर की कीमत एकमुश्त न वसूला जाए। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुविधा देना है न कि उन पर आर्थिक बोझ डालना है।
एके शर्मा ने जारी बयान में कहा कि पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा कुछ क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर की कीमत एकमुश्त रूप से उपभोक्ताओं से वसूली जा रही है, जिसके कारण उपभोक्ताओं में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि अब तक 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। मीटरों की स्थापना से विद्युत कर्मियों के मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिससे त्रुटियों, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी घटेंगीं। वहीं उपभोक्ता संतुष्टि में वृद्धि होगी।
उपभोक्ताओं के हिसाब से सृजित किए जाएं पद
पॉवर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल और राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई। इस दौरान अभियंता संघ ने मांग की कि विभिन्न निगमों में हिसाब से पद सृजित किए जाएं। सात विजाला कमचारियों को रियायती बिजली की सुविधा देने की मां की गई।
संघ ने स्पष्ट किया कि निजीकरण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। विद्युत अभियंता इसका हर स्तर पर विरोध करेंगे। अभियंता संघ ने कहा कि निजीकरण की टेंडर नोटिस प्रकाशित होने पर अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होंगे।
जुड़े फैसले से बढ़ा आक्रोश
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा है कि 16 सितंबर को ऊर्जा मंत्री समूह की हुई बैठक में तय किया गया है कि विद्युत वितरण निगमों के संचालन के लिए राज्य सरकारों को तीन विकल्प दिए जाए। जो राज्य सरकार इन तीनों विकल्पों को न माने उनको केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट बंद कर दी जाए। समूह के इस फैसले से बिजली कर्मियों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही
स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले की सीबीआई जांच हो
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले की सीबीआई अथवा अन्य उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर प्रदेश में बड़े घपले की तैयारी है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं पर जानबूझ कर बोझ डाला जा रहा है। महाराष्ट्र में सभी मॉड्यूल सहित उपभोक्ता से मीटर की कीमत सिर्फ 2610 रुपये ली जा रही है।
जबकि उत्तर प्रदेश में 6016 रुपये लिया जा रहा है। स्मार्ट मीटर के लिए केंद्र सरकार द्वारा 18885 करोड़ अनुमोदित किया गया था, जबकि प्रदेश में यह टेंडर 27342 करोड़ में किया गया। ऐसे में 8500 करोड़ रुपया अतिरिक्त खर्च किया गया। इस मामले की भी सीबीआई से जांच कराई जाए।
वर्मा ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा द्वारा एक्स पर किए गए पोस्ट पर आपत्ति जताई है। ऊर्जा मंत्री ने पोस्ट किया था कि वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने और पारदर्शिता के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। इस पर अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि पॉवर कॉर्पोरेशन ऊर्जा मंत्री को गुमराह कर रहा है(साभार एजेंसी)
