AI Impact Summit 2026:भारत का विजन,88 देशों-संगठनों की सहमति

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(नई दिल्ली)21फरवरी,2026.

भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ को एक बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी सफलता मिली है। 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए साफ किया कि दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण’ को खुले तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह कदम वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के सुरक्षित, समान और जवाबदेह विकास की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।

वैश्विक सहयोग और ‘सर्वजन हिताय’ का सिद्धांत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कुल 88 हस्ताक्षरकर्ताओं में से 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी का कल्याण, सभी की खुशी) के सिद्धांत को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है। इस विजन का मुख्य लक्ष्य एआई संसाधनों का इस तरह से लोकतंत्रीकरण करना है कि इस उन्नत तकनीक और इसके आर्थिक फायदों की पहुंच दुनिया भर में समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित हो सके।

शिखर सम्मेलन से जुड़ी प्रमुख नीतिगत बातें
यह शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया गया। इस आयोजन ने कई अहम मोर्चों पर वैश्विक नीतियां तय करने का मजबूत आधार रखा है:
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला दुनिया का पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था।
हितधारकों का महामंच: इस आयोजन में दुनिया भर के सरकारी नीति-निर्माताओं, एआई क्षेत्र के उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मानवता के लिए एआई: इस समिट का फोकस एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार करने के साथ-साथ, ‘मानवता के लिए एआई’ के वैश्विक सिद्धांत को आगे बढ़ाना था।

प्रशासन और सुरक्षा: यह शिखर सम्मेलन एआई के प्रशासन, सुरक्षा मानकों और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की एक विकसित होती अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा है।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का यह ऐतिहासिक घोषणापत्र बताता है कि एआई जैसी क्रांतिकारी तकनीक पर अब किसी एक देश या चंद टेक कंपनियों का एकाधिकार नहीं रहेगा। 88 देशों और संगठनों की यह एकजुटता एआई के सुरक्षित विकास और इसके आर्थिक लाभों को विकासशील देशों तक पहुंचाने का रास्ता साफ करेगी। आगे चलकर इन सहमतियों को व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय नीतियों में कैसे बदला जाता है, इस पर उद्योग जगत और निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।(साभार एजेंसी)

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