पराली जलाने पर रोक के लिए नई रणनीति जरूरी

Punjab

(चंडीगढ़,पंजाब)17जून,2026

पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। किसानों के व्यवहार, जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई संचार रणनीति अपनाने की जरूरत है। यह बात काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की एक नई अध्ययन रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट ‘Behaviour Change Approaches to Tackle Stubble Burning at Scale’ के अनुसार, 2022 के बाद पराली जलाने की दर्ज घटनाओं में कमी आई है, लेकिन किसानों के व्यवहार और खेतों में अपनाए जा रहे विकल्पों को भी समझना जरूरी है।

102 किसानों पर किया गया अध्ययन:
यह अध्ययन पंजाब के चार जिलों में 102 किसानों के सर्वेक्षण, समूह चर्चाओं और सरकारी अधिकारियों से बातचीत के आधार पर किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जानकारी की कमी के अलावा भरोसे की कमी, सामाजिक दबाव और आर्थिक चुनौतियां भी किसानों के फैसलों को प्रभावित करती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 78% किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी नहीं थी। 63% किसानों को जरूरत के समय जरूरी जानकारी नहीं मिली। 63% किसानों ने पूरी तरह पराली जलाना छोड़ दिया है। हालांकि 31% किसान अभी भी खेतों में आंशिक रूप से पराली जला रहे हैं।

किसानों तक सही समय पर पहुंचे जानकारी
अध्ययन में कहा गया है कि केवल मशीनें उपलब्ध कराने और जागरूकता बढ़ाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। किसानों तक सही समय पर, सरल भाषा में और भरोसेमंद माध्यमों से जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

CEEW की प्रमुख सिफारिशें:
रिपोर्ट में पंजाब सरकार को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत विशेष “व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीति” लागू करने की सलाह दी गई है। इसके तहत किसानों तक सीधे कृषि अधिकारियों की पहुंच बढ़ाई जाए। सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों का अधिक उपयोग हो। अलग-अलग प्रकार के किसानों के लिए अलग संदेश तैयार किए जाएं। पराली न जलाने को नियम पालन के बजाय किसान की जिम्मेदारी और गर्व से जोड़ा जाए। केवल कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि किसानों के व्यवहार में बदलाव को सफलता का पैमाना बनाया जाए।

किसानों का इरादा सकारात्मक:
CEEW की फेलो प्रार्थना बोरा ने कहा कि पंजाब ने पराली जलाने की घटनाएं कम करने में प्रगति की है, लेकिन इस सफलता को बनाए रखने के लिए व्यवहार परिवर्तन पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसान पराली जलाने के खिलाफ हैं और वैकल्पिक उपाय अपनाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समय पर सही सलाह, मशीनों के उपयोग की जानकारी, लागत और कीट प्रबंधन जैसी समस्याओं का समाधान चाहिए।

पर्यावरण और खेती दोनों के लिए जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवहार आधारित संचार रणनीति अपनाने से किसानों का भरोसा बढ़ेगा, पराली जलाने की घटनाएं और कम होंगी तथा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।(साभार एजेंसी)

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