‘वाघ नख’ की ताकत संग उतरेगा,”INSमालवन”

National

(नई दिल्ली),18जुलाई,2006

भारतीय नौसेना ने ‘मालवन’ का नया प्रतीक-चिह्न (क्रेस्ट) जारी किया है, जिसमें ‘वाघ नख’ को प्रमुखता से दर्शाया गया है। नौसेना के अनुसार, वाघ नख साहस, फुर्ती और निडरता का प्रतीक है। यह प्रतीक भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए हर समय सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन पर चुपचाप तथा सटीक वार करने के जहाज के संकल्प को भी दर्शाता है।

आखिर ‘वाघ नख’ को ही प्रतीक क्यों बनाया गया?
भारतीय नौसेना ने बताया कि क्रेस्ट में शामिल ‘वाघ नख’ केवल एक ऐतिहासिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वीरता, रणनीतिक कौशल, सतर्कता और आक्रामक क्षमता का भी प्रतिनिधित्व करता है। यह जहाज़ के उन मूल्यों को दर्शाता है, जिनके आधार पर वह किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहेगा। यह बदलाव पूरे भारतीय नौसेना के आधिकारिक ध्वज या क्रेस्ट में नहीं, बल्कि केवल आईएनएस मालवन की विशिष्ट पहचान और उसके परिचालन संकल्प को दर्शाने वाला नया प्रतीक-चिह्न है।

समुद्री सुरक्षा के लिए क्या संदेश देता है यह प्रतीक-चिह्न?:
नौसेना के मुताबिक, यह क्रेस्ट भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा के प्रति जहाज की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही यह इस संकल्प का भी प्रतीक है कि जहाज हर परिस्थिति में चौकन्ना रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन पर सटीक एवं प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम होगा।

वर्ष 2022 में जारी किया गया नेवल एनसाइन
इससे पहले वर्ष 2022 में भारतीय नौसेना ने अपनी औपनिवेशिक विरासत से जुड़े सबसे बड़े प्रतीकों में बदलाव किया था। 2 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के कमीशनिंग समारोह के दौरान भारतीय नौसेना का नया ध्वज (नेवल एनसाइन) जारी किया। इस बदलाव के तहत ब्रिटिश शासन के समय से इस्तेमाल हो रहे सेंट जॉर्ज क्रॉस (लाल क्रॉस) को हटाकर उसकी जगह छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा से प्रेरित नीले-सुनहरे अष्टकोणीय प्रतीक को शामिल किया गया। इसे भारतीय नौसेना की स्वदेशी पहचान और औपनिवेशिक प्रतीकों से मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम माना गया।

इसी वर्ष बदला गया नौ सेना का क्रेस्ट:
इसी वर्ष 4 दिसंबर 2022 को नौसेना दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना के आधिकारिक क्रेस्ट (प्रतीक-चिह्न) में भी बदलाव किया गया। नए क्रेस्ट में ‘फाउल्ड एंकर’ (रस्सी से लिपटा लंगर) की जगह ‘क्लियर एंकर’ (साफ लंगर) को अपनाया गया। नौसेना के अनुसार, यह परिवर्तन स्पष्ट दृष्टि, समुद्री सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प, आत्मनिर्भर भारत की भावना और औपनिवेशिक विरासत से दूरी बनाने का प्रतीक है(साभार एजेंसी)

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