लक्षद्वीप में पहली बार निवेशक सम्मेलन का आयोजन

National

(नई दिल्ली)14दिसंबर,2025.

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएचडी) के मत्स्य विभाग ने लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से आज लक्षद्वीप के बंगाराम द्वीप में ‘‘लक्षद्वीप द्वीप समूह के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश के अवसर’’ विषय पर निवेशकों की बैठक का सफल आयोजन किया। द्वीप में आयोजित यह अपनी तरह की पहली निवेशक बैठक थी, जिसमें देश भर के विभिन्न निवेशकों ने भाग लिया। अब तक लगभग 519 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना व्‍यक्‍त की गई।

इस कार्यक्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह; राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, मत्स्य पालन एवं विकास मंत्रालय और पंचायती राज; श्री जॉर्ज कुरियन, एमओएफएएच एंड डी और अल्पसंख्यक कार्य राज्‍य मंत्री और लक्षद्वीप के माननीय प्रशासक श्री प्रफुल्ल पटेल उपस्थित थे।

निवेशकों को बैठक के दौरान अपने अनुभव साझा करने और चुनौतियों को उजागर करने के लिए एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। निवेशकों ने मुख्य भूमि तक उत्पादन के परिवहन, शीत भंडारण की आवश्यकता, बर्फ संयंत्रों और कटाई के बाद प्रबंधन के लिए ठंडे मछली प्रबंधन केंद्रों के विकास सहित कई मुद्दों को रेखांकित किया। निवेशकों ने लगातार विकास को गति देने के लिए लक्षद्वीप के ईईजेड के रणनीतिक उपयोग हेतु साशिमी-ग्रेड टूना के लिए मूल्यवर्धन सुविधाओं, मछली तेल शोधन क्षमताओं, कुशल श्रमिकों की आवश्यकता और सजावटी मछली प्रजनन बैंकों की मांग की।

केंद्रीय मत्स्य पालन एवं जनसंपर्क मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने भाषण में कहा कि भारत सरकार ने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के लिए मत्स्य पालन नियम जारी किए हैं, इसलिए भारत के ईईजेड में मछली पकड़ने वाले मछुआरे अब अधिकृत “एक्सेस पास” के साथ कानूनी रूप से मछली पकड़ सकते हैं, जिससे वे उच्च मूल्य वाली टूना और अन्य मछली उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, भारत के ईईजेड में मौजूद मत्स्य संसाधनों को अब ‘‘भारतीय मूल’’ के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिससे मछली उत्पादों के निर्यात में और अधिक सुविधा होगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने ‘खुले समुद्र में मछली पकड़ने के दिशानिर्देश’ जारी किए हैं, जिनके तहत भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को इन जलक्षेत्रों में मछली पकड़ने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने निवेशकों से आगे आकर द्वीपों में मौजूद विशाल निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया,जिनमें टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के लिए अपार संभावनाएं हैं, जिनकी वैश्विक स्तर पर काफी मांग है(साभार एजेंसी)

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएचडी) के मत्स्य विभाग ने लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से आज लक्षद्वीप के बंगाराम द्वीप में ‘‘लक्षद्वीप द्वीप समूह के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में निवेश के अवसर’’ विषय पर निवेशकों की बैठक का सफल आयोजन किया। द्वीप में आयोजित यह अपनी तरह की पहली निवेशक बैठक थी, जिसमें देश भर के विभिन्न निवेशकों ने भाग लिया। अब तक लगभग 519 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना व्‍यक्‍त की गई।

इस कार्यक्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह; राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, मत्स्य पालन एवं विकास मंत्रालय और पंचायती राज; श्री जॉर्ज कुरियन, एमओएफएएच एंड डी और अल्पसंख्यक कार्य राज्‍य मंत्री और लक्षद्वीप के माननीय प्रशासक श्री प्रफुल्ल पटेल उपस्थित थे।

निवेशकों को बैठक के दौरान अपने अनुभव साझा करने और चुनौतियों को उजागर करने के लिए एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। निवेशकों ने मुख्य भूमि तक उत्पादन के परिवहन, शीत भंडारण की आवश्यकता, बर्फ संयंत्रों और कटाई के बाद प्रबंधन के लिए ठंडे मछली प्रबंधन केंद्रों के विकास सहित कई मुद्दों को रेखांकित किया। निवेशकों ने लगातार विकास को गति देने के लिए लक्षद्वीप के ईईजेड के रणनीतिक उपयोग हेतु साशिमी-ग्रेड टूना के लिए मूल्यवर्धन सुविधाओं, मछली तेल शोधन क्षमताओं, कुशल श्रमिकों की आवश्यकता और सजावटी मछली प्रजनन बैंकों की मांग की।

केंद्रीय मत्स्य पालन एवं जनसंपर्क मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने भाषण में कहा कि भारत सरकार ने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के लिए मत्स्य पालन नियम जारी किए हैं, इसलिए भारत के ईईजेड में मछली पकड़ने वाले मछुआरे अब अधिकृत “एक्सेस पास” के साथ कानूनी रूप से मछली पकड़ सकते हैं, जिससे वे उच्च मूल्य वाली टूना और अन्य मछली उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, भारत के ईईजेड में मौजूद मत्स्य संसाधनों को अब ‘‘भारतीय मूल’’ के रूप में मान्यता दी जाएगी, जिससे मछली उत्पादों के निर्यात में और अधिक सुविधा होगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने ‘खुले समुद्र में मछली पकड़ने के दिशानिर्देश’ जारी किए हैं, जिनके तहत भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को इन जलक्षेत्रों में मछली पकड़ने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। उन्होंने निवेशकों से आगे आकर द्वीपों में मौजूद विशाल निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया,जिनमें टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के लिए अपार संभावनाएं हैं, जिनकी वैश्विक स्तर पर काफी मांग है(साभार एजेंसी)

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