स्कूलों का गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन व ग्रेडिंग करेगा स्क्वाफ

UP / Uttarakhand

(लखनऊ,UP) 1जनवरी,2025.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन में कई बदलाव किए जा रहे हैं। इसी के तहत स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन व उनके कामकाज के आधार पर एक्रीडिटेशन (ग्रेडिंग) करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन फ्रेमवर्क (स्क्वाफ) का विकास कर रहा है।

एनईपी के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर प्रदेश में स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एसएसएसए) की स्थापना की जा रही है। इसका कार्य स्कूलों का गुणवत्तापूर्ण एक्रीडिटेशन सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में एससीईआरटी ने भी एसएसएसए की स्थापना की है। अब एसएसएसए के तहत स्क्वाफ का विकास किया जा रहा है। यह स्कूलों के आकलन का व्यापक ढांचा होगा। इससे विद्यालयों की शैक्षणिक चुनौतियों की पहचान कर सुधार किया जाएगा।

एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशन में एसएसएसए की स्थापना एससीईआरटी में की गई है। यह स्कूलों के आकलन का व्यापक ढांचा है जो मूल्यांकन के साथ ही सुधार के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही स्कूलों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाएगा। इस व्यवस्था को जल्द ही प्रभावी बनाया जाएगा।

पांच पैरामीटर पर होगा मूल्यांकन व ग्रेडिंग:
डॉ. सचान ने बताया कि स्क्वाफ के तहत विद्यालयों का ढांचागत विकास, शिक्षक-कर्मचारियों की स्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता, आवश्यक संसाधन समेत पांच पैरामीटर होंगे। इससें सब पैरामीटर में क्लास रूम, बच्चों की प्रवेश स्थिति, स्मार्ट क्लास, शौचालय, मिड-डे मील यूनिट, निपुण मूल्यांकन आदि के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग की जाएगी। इसके आधार पर आगे स्कूलों की व्यवस्था में आवश्यक सुधार किया जाएगा।

स्क्वाफ लागू करने वाला पहला राज्य हो सकता है यूपी:
यूपी स्क्वाफ को लागू करने वाला पहला प्रदेश हो सकता है। यह व्यवस्था अभी किसी प्रदेश में लागू नहीं है। यूपी के साथ ही गुजरात व असम सरकार ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। प्रदेश में इसे नए सत्र 2026-27 से पहले प्रभावी बनाने की तैयारी है।

बैगलेस डे किया गया है लागू:
प्रदेश में एनईपी के ही तहत इस साल से स्कूलों में बच्चों के लिए बैगलेस डे की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत महीने के आखिरी शनिवार को बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे। इस दिन उन्हें गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई व खेलकूद के जरिये व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। इस सत्र में इसे दस दिन के लिए लागू किया गया है(साभार एजेंसी)

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