(लखनऊ,UP)10मार्च,2026
यूपी कैबिनेट की अहम बैठक आज संपन्न हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नये शहर प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के आठ शहरों में आवासीय योजनाओं के लिए सरकार ने 425 करोड़ रुपए देने का फैसला किया है। जिन शहरों को पैसा देने का फैसला किया गया है, उनमें बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर व मऊ शामिल हैं। इस धनराशि से शहरों में नई आवासीय योजनाएं शुरू करने के लिए भूमि की व्यवस्था की जाएगी। इससे संबंधित आवास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
बता दें कि बड़े शहरों के साथ ही छोटे शहरों में भी प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण, नए शहर प्रोत्साहन योजना में विकास प्राधिकरणों को जमीन लेने को सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 साल के लिए पैसे दे रही है। कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के आठ शहरों को 425 करोड़ रुपये देने का फैसला किया गया है। वाराणसी को ग्राम गंजारी, हरपुर व शिवसागर और मढ़नी में जमीन लेने के लिए 200 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इससे वर्ल्ड सिटी एक्सपो भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना वाराणसी विकास प्राधिकरण लाएगा।
बरेली विकास प्राधिकरण में 150 करोड़ से आसपुर, खूबचंद, अडूपुरा, जागीर, अहिलादपुर, बरकापुर, कुम्हरा, कलापुर, मोहरनियां, नवदिया, कुर्मियांनव व हरहरपुर में जमीन ली जाएगी। उरई को 30, आवास विकास परिषद को चित्रकूट में भूमि लेने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। आवास विकास परिषद को बांदा के लिए 30 करोड़, कटरा रोड प्रतापगढ़ के लिए 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। गाजीपुर के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
12,200 ग्राम सभाओं तक चलेंगी बसें, परमिट व टैक्स से होंगी मुक्त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट ने प्रदेश की 12,200 ग्राम सभाओं तक बस की सेवा पहुंचाने का फैसला लिया। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ के माध्यम से प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। पंचायत चुनाव से पहले कैबिनेट ने इस योजना के जरिये ग्रामीणों को तोहफा दिया है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत प्रदेश की सभी ग्राम सभाओं तक बसों की उपलब्धता का फैसला लिया गया है। इससे ग्रामीण आबादी लाभांवित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए सुबह 10 बजे तक जिला मुख्यालय तक पहुंचेंगी।
इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। करीब 5000 गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसों को मोड़ने में दिक्कत होती है। लिहाजा इन गांवों में छोटी बसें चलाई जाएंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी। सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी। इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी।
कमेटी करेगी किराया निर्धारित
परिवहन मंत्री ने बताया कि कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारण करेगी। इसका टिकट भी सस्ता रहेगा। योजना के तहत प्रत्येक आवेदक (जिस ब्लॉक के लिए उसने आवेदन किया है) को समस्त ग्राम पंचायत एवं रूट पर अपने विवेकानुसार वाहन संचालन करने तथा फेरों की संख्या का अधिकार होगा। बस संचालक ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार वाहन सेवा प्रदान करेगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन में होगी। आवेदक को 15 दिन में वाहन उपलब्ध कराने होंगे। वहीं निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिनों में पूरी की जाएगी। आवेदनों का परीक्षण एवं चयन कमेटी द्वारा किया जाएगा। कमेटी द्वारा सेवा प्रदाताओं का चयन करते हुए मार्ग निर्धारण को अंतिम रूप दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व क्षेत्रीय प्रबंधकों का होगा, जो नियमित रूप से (न्यूनतम मासिक) आयुक्त को कार्य प्रगति से अवगत कराएंगे।
प्रदेश में अब ओला, उबर आदि को भी कराना होगा पंजीकरण
कैबिनेट ने यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के दृष्टिगत ओला और उबर आदि टैक्सी के पंजीकरण का फैसला लिया है। सेवा प्रदाता कंपनियां अब बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ियों का संचालन नहीं कर पाएंगे। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 की नियमावली में केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को संशोधन किया था। इस नियमावली को अब प्रदेश में भी लागू किया गया है। पहले ओला-उबर पर नियंत्रण नहीं था लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण के दायरे में लाया गया है।
आवेदन, लाइसेंस और नवीनीकरण शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे। अब ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी होगा। यूपी में अधिसूचना जारी होने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी। 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होगा और इसके लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि सभी जानकारी एक जगह रहे इसके लिए अत्याधुनिक एप विकसित किया जाएगा।
शहरों में दूर होगी आवासीय समस्या, कम कीमत में मिलेंगे सस्ते मकान
राज्य सरकार ने शहरी लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पीएम आवास योजना-2 (शहरी) के तहत अब ईडब्ल्यूएस के साथ ही एलआईजी और मिनी एमआईजी मकान भी बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग के लोगों को भी सस्ते में मकान उपलब्ध होगा। इन मकानों का आवंटन लॉटरी पद्धति से होगा। वहीं ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों की क्षेत्रफल बढ़ाकर 30 वर्ग मीटर कर दिया गया है। हालांकि इसकी कीमत लगभग नौ लाख तक होगी। इससे अधिक बड़े क्षेत्रफल वाले मकानों की कीमत रेरा की सहमति से तय किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पीएम आवास योजना शहरी-2 के तहत ‘भागीदारी में किफायती आवास’ (एएचपी) और ‘किफायती किराया आवास'(एआरएच) घटक के तहत मकान बनाने की नीति को मंजूरी दी गई है। आवास विभाग के प्रस्ताव के मुतबिक विकास प्राधिकरणों के साथ बिल्डरों द्वारा इन मकानों को बनाया जाएगा। बिल्डरों को बड़े मकानों के साथ छोटे मकानों को बनाने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें भू-उपयोग और एफएआर में भी छूट दी जाएगी। इन मकानों को लेने वालों को ढाई लाख रुपये की छूट दी जाएगी।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन के लिए जल्द विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
योजना के अंतर्गत दुर्बल आय वर्ग के भवनों के निर्माण के लिए केंद्रांश के रूप में 1.50 लाख और राज्यांश का एक लाख रुपये दिया जाएगा। इसके माध्यम से दुर्बल आय वर्ग के लोगों को कम कीमत पर मकान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पीएम आवास शहरी-दो में मकान बनाने वाले बिल्डरों को इंसेटिंग के रूप में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानिचत्र शुल्क, वह्य विकास शुल्क और लाभार्थियों को मकान की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप शुल्क में छूट दी जाएगी। शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, उद्योगों, संस्थाओं के कर्मचारियों और अन्य पात्र ईडब्ल्यूएस व एलआईजी परिवारों के लिए निजी सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा आवास बनाकर किराए पर दिए जाएंगे। ऐसे मकान बनाने वालों को भी छूट की सुविधा दी जाएगी।
अवैध कब्जे वाले कांशीराम आवास पात्र दलितों को दिए जाएंगे
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कांशीराम आवासों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने कांशीराम आवास योजना के कई आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाएगा और उनकी रंगाई-पुताई व मरम्मत कराकर पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन आवासों को फिर से जरूरतमंद दलित परिवारों को उपलब्ध कराना है।
उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव के तहत योगी सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। शिक्षकों का समाज निर्माण और शिक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा।
साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी 2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा। प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे और इस पर सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा।
इस व्यय की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर शहर से जोड़ेंगे दो नए पुल, 460 करोड़ स्वीकृत
ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर बनने वाले पुल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। यातायात दबाव को देखते हुए चार लेन के एक पुल की बजाय दो-दो लेन के दो अलग-अलग सेतु बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कार्य अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत कराया जाएगा।
इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु और उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा। ट्रांसगंगा सिटी विकसित होने के बाद गंगा नदी पार करने के लिए भारी और हल्के वाहनों का यातायात काफी बढ़ेगा। इससे मौजूदा गंगा बैराज मार्ग पर जाम की समस्या और बढ़ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए गंगा पर नए सेतु के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 753.13 करोड़ रुपये है। इसमें से 460 करोड़ की धनराशि अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत दी जाएगी, जबकि शेष राशि यूपीसीडा अपने संसाधनों से खर्च करेगा।
सरकारी कर्मचारियों को हर वर्ष देना होगा अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 और नियम-24 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। संशोधन के तहत नियम-21 में यह व्यवस्था की गई है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी।
इसी तरह नियम-24 में भी बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी।
इसके अलावा अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित नियम में भी संशोधन किया गया है। पहले सरकारी कर्मचारियों को हर पांच वर्ष में अपनी अचल संपत्ति की जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब यह जानकारी हर वर्ष देना अनिवार्य किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इन संशोधनों से सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।(साभार एजेंसी
