राम मंदिर चढ़ावा चोरी:जमीन खरीद जांच करेगी एसआईटी

Uttar Pradesh

(लखनऊ,UP)25जून,2026.

राम मंदिर की दानराशि में हेरफेर की जांच कर रही एसआईटी ने अब विस्तृत जांच में मंदिर ट्रस्ट की ओर से की गई जमीन खरीद के पहलू को शामिल किया है। वर्ष 2021 से अब तक हुए भूमि सौदों से जुड़े दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। जमीन खरीद को लेकर पिछले कुछ वर्षों में लगे आरोपों और सामने आए दस्तावेजों के आधार पर एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि सभी सौदे निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत हुए थे या नहीं। जांच में मसले की परतें खुलेंगी।

राम मंदिर के लिए जमीन खरीद को लेकर समय-समय पर कई विवाद सामने आए थे। विभिन्न पक्षों ने दस्तावेजों के आधार पर कुछ सौदों में अनियमितता, कीमतों में भारी अंतर और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। हालांकि ट्रस्ट की ओर से हमेशा सभी खरीद प्रक्रियाओं को पारदर्शी और नियमसम्मत बताया जाता रहा है। अब एसआईटी ने अपनी विस्तृत जांच में इन आरोपों को भी शामिल कर लिया है।

सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भूमि खरीद के दौरान जमीनों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया, भुगतान प्रक्रिया में क्या मानक अपनाए गए और विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन कैसे प्राप्त हुए। कुछ मामलों में बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के बीच बड़े अंतर को लेकर भी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। भूमि खरीद से संबंधित फाइलों, अनुमोदनों, भुगतान अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इस क्रम में तीन लोगों से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी सामने आ रही है।

एसआईटी को दस्तावेज सौपेंगे संजय:
आप सांसद संजय सिंह बृहस्पतिवार को लखनऊ मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर दस्तावेज देंगे। उन्होंने खुद वीडियो जारी कर इसकी जानकारी दी है। कहा है कि एसआईटी प्रमुख व लखनऊ के मंडलायुक्त ने दस्तावेज देने के लिए बुलाया है। वह चढ़ावा चोरी और जमीन घोटाले के सबूत और कागजात देंगे। बता दें कि संजय सिंह ने प्रेसवार्ता कर चंपत राय पर जमीन खरीद में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

ऑडिट में मिली थीं खामियां, ट्रस्ट ने नजरअंदाज कर दी रिपोर्ट
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बीच एक ऐसा तथ्य सामने आया है, जिसने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद निजी ऑडिट फर्म ने दान प्रबंधन, आभूषणों के रिकॉर्ड, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर संकेत कर सुधार की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। सवाल है कि यदि कमियां छह साल पहले ही सामने आ गई थीं तो उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। सूत्रों के मुताबिक फर्म ने रिपोर्ट में कहा था कि वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए जरूरी अभिलेखों का अभाव है और प्रबंधन की जवाबदेही तय करने वाली स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था भी नहीं है।

अब हाईकोर्ट में सुनवाई 29 जून को
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में समयाभाव की वजह से फिर सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर अब 29 जून को सुनवाई संभावित है।
याचिका में मामले की जांच सीबीआई से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से कराने की मांग की गई है। याचिका न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्म अवकाश कालीन खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी।
प्रकरण की जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाने वाली पीआईएल पर भी 29 जून को ही सुनवाई संंभावित है।

कई पदाधिकारियों के नाम हैं इसमें
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जमीन खरीद से जुड़े निर्णयों में किन-किन पदाधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका रही। जो भी जमीन से जुड़े दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हुए और जो लिखापढ़ी में हैं उनमें अधिकतर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ही नाम है।

इसके अलावा भी कई पदाधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। जांच में ये देखा जाएगा कि जमीन की खरीदारी निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारों पर शिकंजा कस
सकता है।(साभार एजेंसी)

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