(नई दिल्ली)11अगस्त,2026
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार से ऑनलाइन होने वाले गंभीर नुकसान से निपटने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार करने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने को कहा। याचिका में रेप और जान से मारने की धमकी, डॉक्सिंग (निजी जानकारी को सार्वजनिक करना), बच्चों की निजी जानकारी उजागर करना और बिना सहमति के निजी या डीपफेक कंटेंट के प्रसार जैसी घटनाओं से निपटने के लिए समय-सीमा वाली, URL-विशिष्ट और कानूनी या न्यायिक निगरानी के अधीन व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की ओर से अपने सुझाव पत्र में उठाए गए मुद्दों पर विचार करे और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए। सुनवाई के दौरान वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने ऑनलाइन खतरों से निपटने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने अदालत के सामने सवाल रखा, ‘मान लीजिए कि आज रात 9 बजे किसी महिला के घर का पता दुष्कर्म की धमकी के साथ पोस्ट किया जाता है। क्या इसे इस स्तर पर ऑनलाइन रहने दिया जाएगा?
अदालत की टिप्पणी
CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों, प्रकारों और पहलुओं को ‘बहुत अच्छे से उजागर किया है’। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि इन खतरों का पता लगाने और उनसे बचाव के उपायों से जुड़े तकनीकी एवं व्यावहारिक मुद्दे डोमेन विशेषज्ञों यानी संबंधित विषय के विशेषज्ञों के विचार का विषय हैं।(साभार एजेंसी)
