(नई दिल्ली)09अक्टूबर,2026
भारतीय मूल की नावी पिल्लै को नोबल शांति पुरस्कार मिला है. उन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी. नोबेल समिति ने नावी पिल्लै के काम को असाधरण करार दिया है।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शांति के लिए भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लै को 2026 का नोबल प्राइज दिया है. दक्षिण अफ्रीका की जज और वकील रह चुकीं, नावी को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार दिया है. कमेटी ने उनके प्रयासों को असाधारण करार दिया है. अहम बात यह भी है कि वे दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में पहली गैर-श्वेत महिला जज रही थीं.
‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक नोबल कमेटी ने कहा, ‘उनके शुरुआती काम से लेकर हमारे समय के कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अदालती मामलों में एक जज के रूप में दी गई उनकी सेवाओं तक, एक खास मैसेज की तरह दिखाई देता है. उन्होंने जिसमें उन्होंने नेल्सन मंडेला और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्य लोगों का बचाव किया था.’
नावी पिल्लै को कितनी मिलेगी प्राइज मनी:
साहित्य, रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा के बाद यह शांति पुरस्कार इस सप्ताह दिया जाने वाला पांचवां नोबेल पुरस्कार है. 2025 में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने यह प्राइज जीता था. शांति के लिए नोबल जीतने वाली नावी पिल्लै को 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना (करीब 11.66 करोड़ रुपए) भी मिलेंगे. उन्हें 10 दिसंबर को ओस्लो में प्राइज दिया जाएगा।
भारतीय तमिल परिवार में हुआ था जन्म:
नावी पिल्लै का जन्म 23 दिसंबर 1941 में एक भारतीय तमिल परिवार में हुआ था. उन्होंने रंगभेद के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका में लंबी लड़ाई लड़ी. उन्होंने बतौर वकील इसके खिलाफ आवाज उठाई. नावी नेल्सन मंडेला समेत कई राजनीतिक बंदियों के अधिकारियों के लिए लड़ीं. अहम बात यह भी है कि वे 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं।(साभार एजेंसी)
