(लखनऊ,UP)15अक्टूबर,2026
तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से नागरिक सुविधाओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को देखते हुए अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे धार्मिक नगरों में पर्यटन शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है। अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि इन नगरों में हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सफाई, पेयजल और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने को कानूनी प्रावधानों के तहत पर्यटन शुल्क लगाया जा सकता है।
गोमती नगर स्थित एक होटल में छठे राज्य वित्त आयोग, यूनिसेफ और डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के 17 नगर निगमों के महापौरों ने शहरी चुनौतियों और निकायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर मंथन किया। सम्मेलन का विषय शहरों की बात सुनना, शहरी चुनौतियों का समाधान था। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता सशक्त और आधुनिक शहरों के विकास का आधार है। बढ़ते शहरीकरण के बीच बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निकायों को आय बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन मजबूत करने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की जरूरत है।
सम्मेलन में संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने, कर संग्रह में सुधार, उपयोगकर्ता शुल्क और परिसंपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल से आय बढ़ाने पर चर्चा हुई। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए म्युनिसिपल बॉण्ड जैसे वित्तीय विकल्पों पर भी जोर दिया गया। खन्ना ने स्वच्छता, सीवरेज, सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मल के सुरक्षित निस्तारण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को शहरी विकास की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। महापौरों ने पेयजल, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, नगर नियोजन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर अनुभव साझा किए। 16वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग के संदर्भ में निकायों की वित्तीय स्थिति, संस्थागत क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर भी विचार हुआ। सम्मेलन में छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, आयोग के सचिव सिद्धार्थ श्रीवास्तव और यूनिसेफ के डॉ. सौमेन बागची सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।(साभार एजेंसी)
