(चंडीगढ़)17अक्टूबर,2026
चंडीगढ़ की पहचान मानी जाने वाली सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रामसर साइट घोषित किया गया है। 15 अक्टूबर 2026 को रामसर कन्वेंशन की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, सुखना वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में शामिल किया गया है।
शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुखना वेटलैंड चंडीगढ़ के लिए पर्यावरणीय और पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह जलाशय आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले पानी और तलछट के प्रवाह को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। यहां जलस्तर में मौसम के अनुसार बदलाव होता है और खुले पानी से लेकर जलीय वनस्पति, झाड़ियों तथा वन क्षेत्र तक विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक आवास मौजूद हैं।
प्रवासी पक्षियों और दुर्लभ प्रजातियों के लिए अहम
सुखना वेटलैंड स्थानीय जलपक्षियों के साथ-साथ मध्य एशियाई फ्लाईवे से होकर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण ठिकाना है। यहां पक्षियों को भोजन, प्रजनन, आराम और सर्दियों में रहने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली उल्लेखनीय प्रजातियों में संकटग्रस्त श्रेणी का कॉमन पोचार्ड पक्षी और विलुप्ति के खतरे का सामना कर रहा पैलस फिश ईगल शामिल हैं। यहां लुप्तप्राय ब्लैक पॉन्ड टर्टल भी पाया जाता है।
संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ी
रामसर साइट का दर्जा मिलने से सुखना वेटलैंड के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन का महत्व और बढ़ गया है। रामसर कन्वेंशन के अनुसार, इस क्षेत्र के सामने जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली मिट्टी और तलछट का जमाव तथा आक्रामक पौधों की वृद्धि जैसी चुनौतियां हैं। इनके नियंत्रण के लिए मिट्टी एवं नमी संरक्षण के कार्य और आक्रामक वनस्पतियों को समय-समय पर हटाने जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने दी बधाई
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भूपेंद्र यादव ने इस उपबल्धि को लेकर X पर पोस्ट करते हुए कहा चंडीगढ़ की सुखना झील और उत्तर प्रदेश की सौज झील को रामसर साइटों की सूची में शामिल किया गया है।
यह उपलब्धि जैव विविधता के संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा को बेहतर बनाने और स्थानीय लोगों की आजीविका को बनाए रखने में आर्द्रभूमियों के महत्व को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लगातार प्राथमिकता दे रही है।इन दोनों झीलों को रामसर साइट का दर्जा मिलना भारत के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के निरंतर प्रयासों की पुष्टि करता है। ये आर्द्रभूमियां पारिस्थितिकी संतुलन, जलवायु सुरक्षा और स्थानीय आजीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मैं इस उपलब्धि के लिए उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ को बधाई देता हूं।
क्या है रामसर साइट?
रामसर साइट एक ऐसी आर्द्रभूमि होती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जाती है। इन क्षेत्रों में झीलें, दलदल, नदी के कुछ हिस्से, तटीय क्षेत्र और ऐसे अन्य जलक्षेत्र शामिल हो सकते हैं, जो जैव विविधता और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ईरान के रामसर शहर में 2 फरवरी 1971 को आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ था। इसे रामसर कन्वेंशन कहा जाता है। इसी समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा दिया जाता है।(साभार एजेंसी)
