सरयू तट पर दीपों की रोशनी से जगमगाएगी रामनगरी

Uttar Pradesh

(अयोध्या, UP)04नवंबर,2026

रामनगरी की दहलीज पर दीपों का महापर्व दस्तक दे चुका है। सरयू की लहरों से लेकर श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक आस्था, उल्लास और उत्सव की रोशनी फैलने को तैयार है। मंदिरों की नगरी पूरी तरह सज-संवर कर दीपोत्सव के स्वागत के लिए तैयार खड़ी है। बृहस्पतिवार से पांच दिवसीय दीपोत्सव का शंखनाद होने जा रहा है। अगले पांच दिनों तक अयोध्या केवल दीपों से ही नहीं, बल्कि रामकथा, लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम से रोशन होगी।

इस बार के दीपोत्सव का वैभव अंतरराष्ट्रीय रंगों में भी नजर आएगा। पांच देशों की रामलीला मंडलियां प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन करेंगी। विभिन्न देशों की रामलीला में रामकथा के अलग-अलग स्वरूप देखने को मिलेंगे। वहीं देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी लोक परंपराओं, वेशभूषा, नृत्य और संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक भारत की झलक दिखाएंगे। रामनगरी की गलियों और आयोजन स्थलों पर उत्सव का उल्लास और गहरा हो गया है।

सांस्कृतिक मंचन का होगा आगाज

दीपोत्सव को भव्य और यादगार बनाने के लिए तैयारियां अंतिम दौर में हैं। राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप सजाने की योजना है। घाटों पर दीप पहुंच चुके हैं और उन्हें सुव्यवस्थित रूप से बिछाने का काम प्रारंभ हो रहा है। सात नवंबर को दीपोत्सव का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा।

जब राम की पैड़ी पर दीपों की कतारें एक साथ जलेंगी तो सरयू तट सुनहरी आभा से जगमगा उठेगा। घाटों पर दीप सजाने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और कर्मचारी लगे हुए हैं। बृहस्पतिवार से लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन शुरू हो जाएगा।

श्रीराम जन्मभूमि परिसर भी तैयार

श्रीराम जन्मभूमि परिसर भी दीपोत्सव की रोशनी से जगमगाएगा। मंदिर परिसर के पांच जोन में करीब एक लाख दीप जलाने की तैयारी है। परिसर के मंदिरों और प्रमुख स्थानों को भी आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। वहीं रामकथा पार्क सहित प्रमुख आयोजन स्थलों पर मंच, दर्शक दीर्घा, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

दीपोत्सव के मुख्य आकर्षण

  • 30 लाख दीपों का प्रज्ज्वलन
  • शोभायात्रा में 22 झांकियां
  • 2100 स्वदेशी ड्रोन का भव्य आकाशीय शो
  • 30 प्रोजेक्शन एवं लेजर शो
  • रामायण के सात कांडों पर आधारित भव्य शोभायात्रा
  • 2147 श्रद्धालुओं द्वारा एक साथ सरयू महाआरती
  • पांच देशों की रामलीला का मंचन
  • 12 मंचों पर 2500 कलाकारों की प्रस्तुति
  • पर्यावरण अनुकूल हरित आतिशबाजी
  • 35,000 स्वयंसेवकों की भागीदारी
  • डिजिटल सहभागिता (रील एवं पेटिंग प्रतियोगिता)
  • 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार और 20 सेल्फी प्वाइंट (साभार एजेंसी)

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