पीएम मोदी ने मॉरिशियस मेहमान को ठहराया 3000 साल पुराने शहर में

UP / Uttarakhand

(वाराणसी,UP )12सितम्बर,2025

मॉरिशियस के पीएम नवीनचंद्र रामगुलाम अपने भारत दौरे पर पीएम मोदी से मिले जहां उन्हें काशी जैसे खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर में ठहराया गया है। एक ऐसी जगह जिसका वर्णन आप शब्दों में जितना कर लें उतना कम है। वाराणसी को बनारस और काशी भी कहते हैं, जो दुनिया के सबसे पुराने बसे हुए शहरों में से एक है, जिसे भारत की धार्मिक राजधानी भी कहते हैं। बनारस पवित्र गंगा नदी के किनारे बसा है और हिंदू धर्म का प्रमुख केंद्र है। इसे “सिटी ऑफ लाइट्स” भी कहते हैं, जहां प्राचीन और आधुनिक संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

इस जगह का आध्यात्मिक और पवित्र माहौल यहां आने वाले हर इंसान को भावुक कर देता है, लेकिन साथ में पुराने शहर की खूबसूरती से भी मंत्रमुग्ध भी कर देता है। अपने सदियों पुराने मंदिर, घाट, गंगा आरती और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड के लिए मशहूर वाराणसी की छोटी-छोटी रस्में और परम्पराएं इंसान को कई चीजों को करीब ले जाती हैं। कहते हैं ये शहर इतिहास से भी अधिक पुराना है।

कुछ ये है शहर का इतिहास
​वाराणसी एक बहुत पुराना शहर है, इतना पुराना कि आप सोच भी ना पाएं। माना जाता है यह जगह भगवान शिव और माता पार्वती ने बनाई थी। ये हजारों सालों से शिक्षा और सभ्यता का केंद्र रहा है। गंगा घाटी में यह शुरुआती बड़े नगरों में से एक था। यहां मसलिन, रेशमी कपड़े और हाथीदांत के काम की वजह से ये बड़ा व्यावसायिक और औद्योगिक केंद्र भी रहा। बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध ने भी यहां के सारनाथ में छठी शताब्दी ईसा पूर्व अपना पहला उपदेश दिया था। इसके अलावा वाराणसी हमेशा से धार्मिक और कला गतिविधियों का गढ़ रहा है।

क्या रहते हुए क्या देखना और महसूस करना चाहिए
जब-जब आप वाराणसी का नाम सुनते होंगे तो दिमाग में घाट, मंदिर, पूजा-पाठ, भीड़ और रेशमी साड़ियां आती हैं। लेकिन यह पवित्र शहर सिर्फ घाटों तक ही सीमित नहीं है। यहां लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए मनोकामना मांगते हैं। वहीं यहां आने वाले लोग जलती चिताओं और अंतिम संस्कार को देखकर जीवन का असली अर्थ समझते हैं। गंगा नदी के शोर से लेकर मंदिरों की घंटियों और घाटों पर चलने वाले कर्मकांड तक, वाराणसी जैसा दूसरा कोई स्थान आपको कहीं नहीं मिलेगा।

यहां रहते हुए क्या देख सकते हैं
घाटों का लें अनुभव: दशाश्वमेध घाट सबसे प्रसिद्ध और भीड़भाड़ वाला घाट है, यहां अग्नि पूजन, गंगा स्नान और धार्मिक कर्मकांड होते हैं। अगर आप भीड़ से बचकर सुबह की आरती देखना चाहते हैं तो अस्सी घाट जरूर जाएं, जो गंगा के दक्षिणी छोर पर स्थित है। इसके अलावा मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट भी देखने लायक हैं।

गंगा की बोट राइड का मजा: सूर्यास्त और सूर्योदय का शानदार नजारा देखना है, तो गंगा में बोट राइड जरूर करें।

बनारस की गलियों में खो जाएं: बनारस की गलियां काफी संकरी हैं, लेकिन असली मजा तो इन्हीं में है, आपको पुराने शहर को अंदर से देखने का अनुभव होगा, यहां फूल मार्केट, कचौड़ी गली और काफी कुछ है।

बनारस की कचौड़ी नहीं खाई तो क्या खाया: वाराणसी की गलियां हर मोड़ पर खाने-पीने के मजेदार खजानों से भरी हैं। यहां आप गरमा-गरम कचौड़ी और मशहूर दाल-बाटी-चोखा से शुरुआत कर सकते हैं। वहीं वाराणसी का स्ट्रीट फूड बिना पान के अधूरा माना जाता है। राजेन्द्र प्रसाद चौरसिया पान भंडार से पान जरूर चखें।

मंदिर और शाम की आरती में भी डूब जाएं:
बनारस आएं हैं तो मंदिर भी जाएं: वाराणसी को मंदिरों का शहर कहा जाता है क्योंकि यहां 3000 से ज्यादा मंदिर और छोटे-छोटे श्रद्धा स्थल बने हुए हैं। सबसे प्रमुख मंदिर है काशी विश्वनाथ मंदिर, जिसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है। इसके अलावा आप भारत माता मंदिर, संकट मोचन मंदिर, कनका दुर्गा मंदिर और अन्नपूर्णा देवी मंदिर भी देख सकते हैं।

शाम की आरती का मजा: वाराणसी के मुख्य घाटों में से एक है दशाश्वमेध घाट, जो गंगा नदी के किनारे स्थित है। इस पूजा में भगवान शिव, गंगा मैया, सूर्यदेव, अग्निदेव और पूरे आकाश की आराधना की जाती है।

कैसे पहुंचे काशी:
हवाई मार्ग से: वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से शहर तक जाने के लिए टैक्सी मिलती है जिसकी कीमत करीब 700 के आसपास है। चाहें तो 10 रु प्रति व्यक्ति वाली शेयरिंग ऑटो से बाबतपुर तक जा सकते हैं। वहां से बस भी मिल जाती है।
रेल मार्ग से: वाराणसी जंक्शन और बनारस रेलवे स्टेशन भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं। वाराणसी जंक्शन से शहर तक टैक्सी का किराया करीब 200 रु है जबकि बनारस स्टेशन से करीबन 130 रु में टैक्सी मिल जाती है।
टैक्सी से: वाराणसी सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ा है। दिल्ली (करीब 890 किमी) और लखनऊ (करीब 322 किमी) से टैक्सी मिल जाती है। दिल्ली से आने पर किराया लगभग 10,500 रु और लखनऊ से करीब 4,000 रु तक होता है।
बस से : दिल्ली, लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों से वाराणसी के लिए बसें चलती रहती हैं।(साभार एजेंसी)

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