( जयपुर )12सितम्बर,2025.
राजस्थान में अब लालच, धोखे या डर दिखाकर धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है. भजनलाल सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025’ हंगामे के बीच पारित करवा दिया. बिल लागू होने के बाद बिना कलेक्टर की अनुमति के किसी का भी धर्म परिवर्तन या शादी के जरिए किया गया धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा. इसके लिए 7 से 20 साल तक की कैद की सजा हो सकती है. बिल में यह प्रावधान भी है कि गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वाले संस्थानों की इमारतों को सील करने और तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
दोबारा पेश हुआ बिल: ‘प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजन बिल 2025’ को दोबारा विधानसभा में पेश किया गया. इसे बहस के बाद पास कर दिया गया. गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बिल पेश करते हुए कहा कि संविधान में हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और पूजा पद्धति अपनाने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह भी है कि आपके आचरण और व्यवहार से किसी अन्य धर्म के धर्मावलंबी को ठेस न पहुंचे।
मंत्री बेढम ने क्या कहा, सुनिए..
उन्होंने कहा कि आजकल अनेक धार्मिक संस्थाओं द्वारा कपट, लोभ-लालच देकर धर्मांतरण करवाने के प्रयास किए जाते हैं. अनेक संस्थाएं और व्यक्ति ऐसा करता है कि दूसरे समुदाय को ठेस पहुंचती है, जिससे कानून-व्यवस्था की दिक्कत आती है. इसलिए धर्म परिवर्तन को परिभाषित किया गया है. इसमें गलत सूचना देना, बलपूर्वक कार्य करना, धोखाधड़ी करना, अन्य तरीके से प्रभाव डालना, जबरदस्ती प्रचार करना, दबाव बनाना और प्रलोभन देना शामिल है. विवाह के जरिए किया गया धर्म परिवर्तन भी कपट की परिभाषा में आएगा।
विधेयक के मायने क्या?
देश सहित प्रदेश में भी कई ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं, जहां लड़की या लड़के का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है. राजस्थान सरकार इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यह कानून लेकर आई है, जो झारखंड, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से लागू है. गृह राज्यमंत्री बेढम ने कहा कि इस बिल की बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि राजस्थान के परिपेक्ष्य में, चाहे आदिवासी क्षेत्र हों या अन्य, इस तरह के मामले सामने आते हैं. इनकी रोकथाम के लिए यह विधेयक लाना आवश्यक था. कई संस्थाएं समूह बनाकर गलत प्रचार करते हैं और आर्थिक प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाते हैं।
विपक्ष का विरोध जारी रहा: विधानसभा में इस विधेयक पर विपक्ष ने चर्चा नहीं की और लगातार हंगामा करते रहे। इस बीच गृह राज्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सदन में इस बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि दो दिन पहले उनके अपने गृह जिले में ही धर्मांतरण का मामला सामने आया था. उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को खुद अहसास है कि यह बिल कितना महत्वपूर्ण है, लेकिन दिल्ली से उन्हें (राहुल गांधी का) संदेश मिला है कि इस बिल का विरोध करना है. इसलिए वे ऐसा कर रहे हैं. सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए ही इस बिल का विरोध किया जा रहा है।
शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन भी अपराध: विधेयक में स्पष्ट कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति शादी के बहाने या झूठी जानकारी देकर धर्म बदलवाता है, तो इसे धर्मांतरण माना जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है. इसे लव जिहाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है. दोषी पाए जाने पर 20 साल तक की कैद हो सकती है. किसी ने सिर्फ धर्म परिवर्तन करवाने के मकसद से शादी की है, तो ऐसी शादी को कोर्ट रद्द कर सकेगा. शादी से पहले या बाद में धर्म बदलवाने की स्थिति में यह विवाह अमान्य माना जाएगा।
सजा के कड़े प्रावधान: विधेयक में नियम तोड़ने पर सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं. जबरन धर्मांतरण अब एक गैर-जमानती अपराध माना जाएगा. अवैध धर्मांतरण पर 7 से 14 साल की जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगेगा. नाबालिग, महिला, दिव्यांग, एससी-एसटी का जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 10 से 20 साल की सजा और 10 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा. सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 20 साल की कैद या उम्रकैद, साथ ही 25 लाख रुपए का जुर्माना. इसी प्रकार विदेशी या अवैध फंडिंग से धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल जेल और 20 लाख रुपए जुर्माना. बार-बार अपराध करने पर आजीवन कारावास का प्रावधान. अवैध धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं की इमारतों पर कार्रवाई से पहले 72 घंटे का नोटिस दिया जाएगा।
सहमति से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया: विधेयक के अनुसार धर्म में लौटने को ‘घर वापसी’ कहा गया है. इसे धर्म परिवर्तन की परिभाषा से बाहर रखा गया है. यदि कोई अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसके लिए भी प्रशासनिक मंजूरी जरूरी होगी. इसके लिए एक सख्त प्रक्रिया निर्धारित की गई है:
व्यक्ति को कम से कम 90 दिन पहले कलेक्टर या एडीएम को घोषणा देनी होगी.
संबंधित धर्मगुरु को भी दो महीने पहले नोटिस देना होगा.
यह घोषणा सार्वजनिक की जाएगी और नोटिस बोर्ड पर चिपकाई जाएगी.
इसके बाद 2 महीने तक आपत्तियां मंगाई जाएंगी.
सुनवाई और सभी आपत्तियों का निपटारा होने के बाद ही धर्म परिवर्तन मान्य होगा।
विधायकों ने इस बिल पर रखे विचार: इस बिल पर बोलते हुए भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने मूल धर्म में घर वापसी का न्यौता दिया. वहीं, आरएलडी विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने इस बिल के प्रावधानों के दुरूपयोग की आशंका भी जताई है. गोपाल शर्मा के बयान को लेकर रफीक खान का कहना है कि उन्हें उनकी पार्टी ही गंभीरता से नहीं ले रही है. धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक पर चर्चा के दौरान गोपाल शर्मा ने कहा, इतना सोनिया गांधी के चक्कर में मत पड़िए, राहुल गांधी के चक्कर में मत पड़िए. ये लोग देश को बांटने वाले हैं।
वहीं, आरएलडी विधायक डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा, यह बिल लाने की नौबत क्यों आई?. उन्होंने इस विधेयक में सजा के प्रावधान को लेकर कहा कि देश के किसी भी राज्य में धर्मपरिवर्तन विरोधी बिल में इतनी कड़ी सजा का प्रावधान नहीं है. कड़ी सजा का प्रावधान होने के कारण इसके दुरूपयोग की आशंका होगी और पुलिस की मर्जी चलेगी. भारत आदिवासी पार्टी के विधायक थावरचंद ने कहा कि वह आदिवासी हैं. वह हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पहले जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की व्यवस्था थी. जिसे खत्म कर दिया गया. उन्होंने इस व्यवस्था को बहाल करने की मांग उठाई।
रविंद्र सिंह भाटी ने दिया समर्थनः राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक पर चर्चा के दौरान शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा “जब-जब धर्म के मिटने का खतरा हुआ है, जब-जब अधर्म ने अपने पैर पसारे हैं, तब-तब भगवान श्रीकृष्ण अवतार लेकर अधर्म का नाश करते आए हैं. भाटी ने कहा कि वह उस वंश से आते हैं जिसने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सदियों तक प्राणों की आहुति दी है. भाटी ने कहा कि हमारा देश मज़बूत है, लेकिन इसकी जड़ों को कमजोर करने की कोशिशें लगातार जारी हैं. कई राजनीतिक स्वार्थी दल और विदेशी ताकतें भोली-भाली जनता को धर्म और पैसों के लालच में फंसाकर सामूहिक धर्मांतरण करवा रही हैं.।उन्होंने इसे सीधे-सीधे देश की एकता और अखंडता पर हमला बताया. भाटी ने जोर देते हुए कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून समय की मांग है और इसे पास करना ही होगा।
सीपी जोशी ने बताया ऐतिहासिक कदम: विधेयक पारित होने पर चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने इसे ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने राज्य सरकार को बधाई दी. सांसद सीपी जोशी ने कहा कि धर्मांतरण विरोधी बिल पारित होने से अब प्रदेश में जबरन, छल, प्रलोभन, विवाह अथवा अन्य किसी भी माध्यम से किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर कड़ी रोक लगेगी। (साभार एजेंसी)
