दिल्ली सरकार का नया “पावर सेंटर” बनेंगे टि्वन टावर

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(नई दिल्ली)10अक्टूबर,2025.

दिल्ली सरकार का नया सचिवालय आईटीओ पर बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने आईटीओ क्षेत्र में दो ऊंचे ट्विन टावर बनाने की योजना तैयार की है। यह राजधानी की नई प्रशासनिक पहचान बनेगी।

यह प्रस्ताव दिल्ली सरकार के सभी प्रमुख विभागों को एक जगह लाने का लक्ष्य लेकर बनाया गया है। साथ ही राजधानी के पुराने और बिखरे हुए कार्यालय ढांचे को भी बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। विकास मिनार और उसके साथ सटे कार्यालय ब्लॉक, जहां वर्तमान में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) के दफ्तर स्थित हैं, को तोड़कर नया सचिवालय कॉम्प्लेक्स तैयार किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित है ‌।

यह करीब 53,603 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला होगा। दोनों टावर एक-दूसरे से या तो स्काई ब्रिज या भूमिगत मार्ग के जरिये जुड़े होंगे ताकि विभागों के बीच सुचारू आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी। इन इमारतों में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी, ऊर्जा दक्ष डिजाइन, उन्नत फायर सेफ्टी सिस्टम और केंद्रीयकृत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।

एक दिल्ली, एक सचिवालय की दिशा में कदम:
राजधानी में फिलहाल दिल्ली सचिवालय, सिविल लाइंस, आईपी एस्टेट और कई अन्य स्थानों पर बिखरे सरकारी दफ्तरों के कारण प्रशासनिक कामकाज में देरी और समन्वय की कमी दिखती है। नया सचिवालय बनने के बाद सीएम, मंत्री परिषद, मुख्य सचिव और सभी प्रमुख विभाग एक ही परिसर में काम करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा वर्तमान सचिवालय 1982 में एशियाई खेलों के लिए बने आवासों को परिवर्तित कर तैयार किया गया था, लेकिन अब वह क्षमता से कहीं अधिक उपयोग में है। आधुनिक शासन प्रणाली के लिए यह ढांचा अब उपयुक्त नहीं रह गया है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का मानना है कि आईटीओ का चयन न केवल स्थान की दृष्टि से उपयुक्त है बल्कि यह दिल्ली की नई स्काइलाइन को भी परिभाषित करेगा। यमुना नदी के किनारे और विकास मार्ग के समीप स्थित यह इलाका शहर का प्रशासनिक और यातायात केंद्र दोनों है। नई इमारतें यहां बनने से यह क्षेत्र न केवल आधुनिक दृष्टि से विकसित होगा बल्कि आसपास के क्षेत्रों प्रगति मैदान, मिंटो रोड, और मंडी हाउस में भी यातायात और सुविधाओं का पुनर्गठन किया जा सकेगा।

परियोजना के लिए 52 करोड़ का प्रस्ताव रखा:
पीडब्ल्यूडी ने परियोजना के लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है, जो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगा। इसके तहत टावरों की ऊंचाई, मंजिलों की संख्या, डिजाइन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़े सभी पहलू तय किए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव को जल्द ही लोक निर्माण मंत्री की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू करने की तैयारी है। परियोजना को पूरा करने में करीब 48 महीने का समय लगेगा। हालांकि आईटीओ को मुख्य स्थान के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने कुछ अन्य खाली सरकारी भूखंडों को भी विकल्पों के तौर पर चिन्हित किया है। इन स्थलों का मूल्यांकन भी मंत्री के समक्ष रखा जाएगा। इसके बावजूद, आईटीओ की केंद्रीय स्थिति और यातायात सुगमता के कारण इसे सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।(साभार एजेंसी)

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