(लखनऊ,UP) 24दिसंबर,2025.
विधान परिषद में बुधवार को जबरदस्त गतिरोध पैदा हो गया। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने एक पूरक प्रश्न पूछा तो सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने उन्हें बैठने के लिए कहा। इस पर लाल बिहारी यादव ने पीठ पर लोकतंत्र की हत्या कर देने का आरोप मढ़ दिया। इस पर सभापति ने नेता प्रतिपक्ष को सदन से जाने के लिए कहा। काफी देर चली नोंकझोंक के बाद लाल बिहारी यादव ने पहले सभी सदस्यों के साथ वॉकआउट किया। सदन में दुबारा आने पर नेता प्रतिपक्ष ने सभापति के पुन: निर्देश पर सदन छोड़ा और खेद प्रकट किया। उसके बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।
विधान परिषद में निर्दल समूह के राजबहादुर सिंह चंदेल और आकाश अग्रवाल कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये यूपी बोर्ड के स्कूलों की मान्यता के नियमों में ढील देने की मांग कर रहे थे। इसी बीच लाल बिहारी यादव भी खड़े होकर सवाल पूछने लगे। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने उन्हें टोका तो उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से उन्हें पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार है। कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि पीठ की अनुमति से ही कोई सवाल पूछा जा सकता है, इसकी स्पष्ट व्यवस्था नियमावली में है।
इस मुद्दे पर गतिरोध इतना बढ़ा कि सभापति ने कहा कि हमें कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य मत कीजिए। इसके बाद भी जब नेता प्रतिपक्ष अपनी बात कहते रहे तो पीठ से उनकी तब कोई बात रिकॉर्ड में न लेने की व्यवस्था दी गई। सपा के अन्य सदस्यों और शिक्षक व निर्दल समूह के सदस्यों ने भी लाल बिहारी यादव को बैठ जाने का सुझाव दिया, पर उन्होंने अपनी बात कहना जारी रखा। इसके बाद पीठ ने उन्हें सदन से जाने के लिए कहा। इस पर नेता प्रतिपक्ष सपा के सभी सदस्यों के साथ यह कहते हुए बाहर चले गए कि हम बहिर्गमन करते हैं।
माफी मांगने के बाद शांत हुआ मामला
पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने सदन में कहा कि पीठ पर आरोप गंभीर विषय है। नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ पीठ से कठोर निर्णय लिया जाना चाहिए। सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष क्षमा मांग लेते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। सभापति ने चंदेल के कथन पर अपनी सहमति जताई।
करीब 15 मिनट बाद नेता प्रतिपक्ष सपा के सभी सदस्यों के साथ सदन में लौटे। सभापति ने नेता प्रतिपक्ष यादव को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पीठ का सम्मान पक्ष-विपक्ष सभी को करना चाहिए। नियमावली और संविधान के दायरे में रहकर ही हम सभी को काम करना है। इसके बाद सपा के सभी सदस्यों ने आपस में विचार-विमर्श किया और नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी सदन से बाहर चले गए। उनके साथ कई और सपा सदस्य जाने लगे तो फिर कहा गया कि इसे नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन का त्याग करना नहीं माना जाएगा। तब सपा के किरणपाल कश्यप समेत कुछ सदस्य रुक गए। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने सदन में आकर पीठ की अनुमति से कहा कि अगर उनकी किसी बात से सभापति आहत हुए हैं तो वे इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।
सपा सदस्यों ने अरावली पर्वत शृंखला मामले पर किया प्रदर्शन।
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सपा सदस्यों ने विधानभवन के मुख्य द्वार पर अरावली पर्वतमाला का मामला उठाते हुए प्रदर्शन किया। सपा सदस्य अतुल प्रधान ने सेव अरावली लिखा पोस्टर लेकर मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि देश में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। सरकार अपने उद्योगपति दोस्तों के लिए सब दांव पर लगा रही है। पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी से यह साबित हो चुका है कि सरकार का पर्यावरण संरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। सपा अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही अनुपूरक बजट पास होने के बाद बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। अंतिम दिन दोनों सदनों में राज्य सरकार ने विधायी कार्य निपटाए।
विपक्ष को बिजली से नहीं, श्रीराम और वंदे मातरम से समस्या : एके शर्म
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बुधवार को विधानसभा में समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोला। प्रश्नकाल के दौरान सपा के अनिल प्रधान द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि विपक्ष को बिजली से नहीं, श्रीराम और वंदे मातरम से समस्या है। प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में जो काम दशकों से नहीं हुए, उसे हम पूरा कर रहे हैं। बांस-बल्ली के सहारे बिजली के तारों को आप छोड़कर गए थे। हम तो एक-एक मजरे को तलाश कर बिजली मुहैया करा रहे हैं। जल्द पूरे प्रदेश में कहीं भी बांस पर बिजली के तार नजर नहीं आएंगे।
ऊर्जा मंत्री ने इससे पहले सपा सदस्य रागिनी सोनकर द्वारा बिजली की मांग और उत्पादन में असमानता के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि सपा सदस्य बाहर कुछ बोलते हैं और अंदर जो लिखकर आते हैं, उसे बोलते हैं। कोई बिजली देखने वाला चश्मा हो तो सपा सदस्यों को दे दिया जाए। अदाणी ग्रुप से महंगी दरों पर बिजली खरीदने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा सरकार ने 11 साल पहले इससे एक रुपये यूनिट महंगी बिजली खरीदने का अनुबंध किया था, जिसका खमियाजा विभाग आज तक भुगत रहा है। सपा सरकार में 13 हजार मेगावाट बिजली की मांग रहती थी, हम 30 हजार मेगावाट की रिकॉर्ड आपूर्ति कर चुके हैं। बिजली का उत्पादन 5875 मेगावाट से बढ़ाकर 11,760 मेगावाट किया है।
स्मार्ट मीटर के दाम तय करेेगा आयोग
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर स्मार्ट फोन की तरह आधुनिक तकनीक है, जो उपभोक्ताओं की सहूलियतों में इजाफा करेगा। इससे किसी को परेशान नहीं होना चाहिए। जहां स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, वहां 5 फीसद पुराने मीटर चेकिंग के लिए छोड़ दिए जाते हैं ताकि दोनों की रीडिंग की तुलना की जा सके। किसी भी पुराने उपभोक्ता से स्मार्ट मीटर लगाने का पैसा नहीं लिया जा रहा है। स्मार्ट मीटर के दाम नियामक आयोग द्वारा तय किया जाएगा। जिन नए उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर का पैसा ले रहे हैं, यदि आयोग मीटर के दाम कम तय करेगा तो उनके बिल में अतिरिक्त राशि समायोजित की जाएगी। वहीं निजीकरण पर बोले कि इस बाबत अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। जो भी निर्णय होगा, वह व्यापक हित में लिया जाएगा। वहीं सपा सदस्य शिवपाल सिंह यादव द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में दिन और रात में 10-10 घंटे बिजली देने की मांग की गई, हालांकि इस पर ऊर्जा मंत्री ने जवाब नहीं दिया।
