माघ में मकर संक्रांति,मौनी अमावस्या

UP / Uttarakhand

(वाराणसी,UP) 7जनवरी,2026

हिंदू धर्म में माघ मास की अनंत महिमा है। इस मास में भगवान श्रीविष्णु, सूर्यदेव और मां गंगा की पूजा आराधना का विशेष फल मिलता है। तीर्थों में स्नान, दान-पुण्य और आराध्य देवों की पूजा को फलदायी माना गया है। इस मास में पवित्र स्नान मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा के स्नान पड़ेंगे। स्नान तिथियों के अलावा 17 व्रत और त्योहार पड़ेंगे।

सनातनी पंचांग के अनुसार 11वां महीना माघ है। मान्यता है कि इस मास में स्नान-दान, देवी-देवता की पूजा का अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। इस मास में माघ महीने में प्रयाग, हरिद्वार, वाराणसी, नासिक, उज्जैन जैसे पवित्र स्थानों पर स्नान-दान करने और प्रयागराज में माघ मेला में कल्पवास करने की मान्यता है।

पंचांगों के अनुसार माघ मास की शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ। जबकि इस मास का पहला स्नान मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। इसके बाद मौनी अमावस्या 18 जनवरी, वसंत पंचमी 23 जनवरी, माघी पूर्णिमा स्नान 31 जनवरी को पड़ेगा। मान्यता है कि माघ मास में सूर्यदेव की पूजा-आराधना करने से जीवन में पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। इसी माह में सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं।

ये हैं व्रत व त्योहार:
माघ मास के प्रमुख व्रत और त्योहारों में संकष्ठी श्रीगणेश चतुर्थी छह जनवरी, मकर संक्रांति व पत्तिला एकादशी 14 जनवरी, तिल द्वादशी 15 को, मास शिवरात्रि व्रत 16 को, मौनी अमावस्या 18 को, गौरी तृतीया 21 को, वरद विनायक श्रीगणेश चतुर्थी 22 को, वसंत पंचमी 23 को, अचला सप्तमी 25 को, दुर्गा अष्टमी 26 को, महानंदा नवमी 27 को, जया एकादशी 29 को, भीष्म द्वादशी 22 को, प्रदोष व्रत 30 को, माघी पूर्णिमा 31 जनवरी को पड़ेगी।

सूर्यदेव को जल दें और करें तिल,गुड़ व कंबल दान:
माघ माह में सूर्य उपासना से मनोकामना पूर्ण होते हैं। पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को जल देना चाहिए। इस मास में विशेष तिथियों पर निराहार व्रत करने चाहिए। नियम-संयम से रहने पर भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा होती है। गीता पाठ का भी महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा होती है। माहभर जल में तिल डालकर स्नान करने, तुलसी के पौधे की पूजा करनी चाहिए। तिल, आंवला से बनी चीजों का दान, गुड़, कंबल दान और सेवन करना लाभदायक होता है।(साभार एजेंसी)

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