खुलेंगे “लो अल्कोहलिक” बार, बढ़ेंगे दाम

UP / Uttarakhand

(लखनऊ,UP)15फरवरी,2026.

उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा आबकारी नीति और आबकारी निर्यात नीति को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। नई आबकारी नीति में किए गए प्रावधानों के बाद आगामी एक अप्रैल से देशी शराब के दामों में बढ़ोतरी हो जाएगी। देशी शराब (36 फीसद धारिता वाली) की ड्यूटी 165 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 173 रुपये कर दी गई है, जिससे उसके दाम में 5 रुपये का इजाफा हो सकता है। वहीं चार अन्य धारिता वाली शराब के दामों में कोई बदलाव नहीं होगा। वहीं अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों के राजस्व में 7.5 फीसद का इजाफा किया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 71,278 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। देशी शराब के दामों में इजाफा होने से करीब 1500 करोड़ रुपये का अधिक राजस्व मिलेगा। शहरों में देशी शराब की खपत कम होने के दृष्टिगत कोटा घटाया जाएगा, जबकि ग्रामीण इलाकों की दुकानों का बढ़ाया जाएगा। कंपोजिट दुकानों, मॉडल शॉप, प्रीमियम मॉडल शॉप, देशी मदिरा एवं भांग की फुटकर दुकानों का व्यवस्थापन वीनीकरण के जरिए होगा।

ई-लॉटरी पोर्टल पर मोबाइल नंबर, पैन करेक्शन इत्यादि हेतु प्रस्तुत आवेदन पत्रों की प्रोसेसिंग फीस 3 हजार रुपये होगी। फुटकर दुकानें सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे खोलने का नियम यथावत रखा गया है। भांग दुकानों की लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। भारत निर्मित विदेशी मदिरा पर विशेष अतिरिक्त प्रतिफल शुल्क में न्यूनतम वृद्धि की गई है, जबकि वाइन तथा कम तीव्रता के मादक पेय (आरटीडी) के एमआरपी को तर्कसंगत करते हुए वाइन पर प्रतिफल शुल्क कम किया गया है। इस पर 0.1 फीसद सांकेतिक ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसानों और फलों का उत्पादन करने वालों को आर्थिक फायदा हो सके।

गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में लो अल्कोहलिक स्ट्रेंथ बिवरेजेज, बीयर, वाइन एवं आरटीडी के बार लाइसेंस मिल सकेंगे। राजस्व जमा एवं अन्य लेन-देन पोर्टल के माध्यम से करना अनिवार्य होगा। थोक कारोबार में मोनोपोली रोकने के लिए नियमों में ढील दी गई है, जिसके बाद डिस्टिलरी या कोई भी कारोबार कर सकेेगा। विभाग अब उठान के आधार पर ही लाइसेंस फीस लेगा।
निर्यात प्रोत्साहित करने के लिए कई सहूलियतें
आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि प्रदेश में निर्मित शराब व अन्य उत्पादों को विदेश में निर्यात करने के लिए आबकारी निर्यात नीति लाई गई है। यह नीति लाने वाला यूपी देश का प्रथम राज्य है। इससे एथनॉल व अन्य संबंधित उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि होगी। नीति में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित किया गया है। डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं का विस्तार करके रोजगार सृजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। मदिरा निर्यात की मात्रा में वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपी की स्थिति मजबूत होगी। देश के विदेशी मुद्रा कोष को बढ़ाने में यूपी की भूमिका बढ़ेगी। निर्यात प्रोत्साहन के लिए बोतल भराई शुल्क, निर्यात पास फीस, फ्रेंचाइजी फीस और स्पेशल फीस की दरों को न्यूनतम कर दिया गया है। मदिरा के ब्रांड पंजीकरण और लेबल अनुमोदन के प्रावधानों को शिथिल किया गया है। फीस की दरों को भी न्यूनतम कर दिया गया है। देश के अंदर अन्य राज्यों को शीरा आधारित एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) के निर्यात पर फीस 0.50 रुपये प्रति बल्क लीटर तक कम कर दी गई है। निर्यात हेतु हेरिटेज मदिरा का निर्माण, टेस्टिंग टैवर्न और फुटकर बिक्री की अनुमति के प्रावधान किए गए हैं।(साभार एजेंसी)

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