(नई दिल्ली)13जून,2026
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने कृषि जैव विविधता से जुड़ी विशेषज्ञ समिति का पुनर्गठन किया गया है। यह समिति जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 13(1) के तहत एक वर्ष के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य कृषि जैव विविधता के संरक्षण, टिकाऊ उपयोग और लाभ साझा करने (ABS) जैसे मुद्दों पर सरकार को विशेषज्ञ सलाह देना है।
पद्मश्री डॉ.पी.एल.गौतम बने समिति के अध्यक्ष:
इस समिति की अध्यक्षता पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी. एल. गौतम को सौंपी गई है। डॉ. गौतम इससे पहले NBA और PPVFRA के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं, PPVFRA के अध्यक्ष को समिति का सह-अध्यक्ष बनाया गया है।
2005 से काम कर रही है यह विशेषज्ञ समिति:
कृषि जैव विविधता पर यह विशेषज्ञ समिति 2005 से कार्य कर रही है और समय-समय पर इसका पुनर्गठन किया जाता रहा है। इसमें कृषि, शोध, शिक्षा और नीति से जुड़े कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
कृषि जैव विविधता पर देती है महत्वपूर्ण सलाह:
यह समिति सरकार को कृषि जैव विविधता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सलाह देती है, जैसे- बीज और फसल विविधता का संरक्षण, पौधों और पशुओं के आनुवंशिक संसाधनों का उपयोग, अंतरराष्ट्रीय समझौतों (ITPGRFA) से जुड़े मुद्दे, शोध और विकास परियोजनाओं में जैव संसाधनों का उपयोग। समिति की सिफारिशें कृषि विकास और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। इससे टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलता है।
कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल:
इस समिति में कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय बीज और पशु आनुवंशिक संसाधन संस्थान, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन, NALSAR विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति भारत में कृषि जैव विविधता के संरक्षण, पारंपरिक फसलों और पशु नस्लों की सुरक्षा तथा जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे देश के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को भी समर्थन मिलेगा।(साभार एजेंसी)
