(लखनऊ,UP)14जून,2026.
यूपी ने पहली बार दो लाख करोड़ रुपये के निर्यात का आंकड़ा पार कर लिया है। राज्य का निर्यात 201241 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 186060 करोड़ रुपये की तुलना में 8.16 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत 5.45 प्रतिशत से बेहतर है, लेकिन कई राज्यों ने इससे कहीं अधिक तेजी से निर्यात बढ़ाया है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बहुत आगे हैं। इन राज्यों ने निर्यात 10 हजार गुना तक बढ़ा दिया है।
वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) के राज्यवार निर्यात आंकड़ों के अनुसार यूपी देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बना हुआ है। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक आगे हैं। यूपी का निर्यात बढ़ा जरूर है लेकिन राजस्थान ने 73.41 प्रतिशत, झारखंड ने 30.9 प्रतिशत और कर्नाटक ने 17.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
सबसे चौंकाने वाली छलांग हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में देखने को मिली है। फिक्की यूपी चैप्टर के चेयरमैन मनोज गुप्ता और आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल के मुताबिक विशेषज्ञों व उद्योग संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार इन राज्यों की तेज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं।
इन राज्यों से निर्यात में हुई तेज वृद्धि
हरियाणा (3306%) : केंद्र सरकार की नई निर्यात रिपोर्टिंग प्रणाली में गुरुग्राम-फरीदाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और ऑटोमोबाइल निर्यात का बेहतर रिकॉर्ड होना प्रमुख कारण माना जा रहा है। हरियाणा में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और मोबाइल निर्यात में तेजी आई है।
दिल्ली (13355%) : विशेषज्ञों के अनुसार निर्यात आंकड़ों के वर्गीकरण और कस्टम पोर्ट आधारित रिपोर्टिंग में बदलाव का बड़ा असर पड़ा है। बड़ी संख्या में व्यापारिक निर्यात दिल्ली से दर्ज हुए।
उत्तराखंड (39565%) : फार्मास्यूटिकल्स, एफएमसीजी और औद्योगिक इकाइयों के निर्यात आंकड़ों के बेहतर संकलन के साथ राज्य के औद्योगिक क्लस्टरों ने योगदान दिया।
हिमाचल प्रदेश (36249%) : दवा उद्योग, मेडिकल उपकरण और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के निर्यात में उछाल के साथ नई रिपोर्टिंग व्यवस्था का भी प्रभाव माना जा रहा है।
पड़ोसी राज्य उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बहुत आगे हैं। इन राज्यों ने निर्यात 10 हजार गुना तक बढ़ा दिया है।
वाणिज्यिक खुफिया एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) के राज्यवार निर्यात आंकड़ों के अनुसार यूपी देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बना हुआ है। गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक आगे हैं। यूपी का निर्यात बढ़ा जरूर है लेकिन राजस्थान ने 73.41 प्रतिशत, झारखंड ने 30.9 प्रतिशत और कर्नाटक ने 17.59 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
सबसे चौंकाने वाली छलांग हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में देखने को मिली है।
फिक्की यूपी चैप्टर के चेयरमैन मनोज गुप्ता और आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल के मुताबिक विशेषज्ञों व उद्योग संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार इन राज्यों की तेज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं।
इन राज्यों से निर्यात में हुई तेज वृद्धि:
हरियाणा (3306%) : केंद्र सरकार की नई निर्यात रिपोर्टिंग प्रणाली में गुरुग्राम-फरीदाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और ऑटोमोबाइल निर्यात का बेहतर रिकॉर्ड होना प्रमुख कारण माना जा रहा है।
हरियाणा में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और मोबाइल निर्यात में तेजी आई है।
दिल्ली (13355%) : विशेषज्ञों के अनुसार निर्यात आंकड़ों के वर्गीकरण और कस्टम पोर्ट आधारित रिपोर्टिंग में बदलाव का बड़ा असर पड़ा है। बड़ी संख्या में व्यापारिक निर्यात दिल्ली से दर्ज हुए।
उत्तराखंड (39565%) : फार्मास्यूटिकल्स, एफएमसीजी और औद्योगिक इकाइयों के निर्यात आंकड़ों के बेहतर संकलन के साथ राज्य के औद्योगिक क्लस्टरों ने योगदान दिया।
हिमाचल प्रदेश (36249%) : दवा उद्योग, मेडिकल उपकरण और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के निर्यात में उछाल के साथ नई रिपोर्टिंग व्यवस्था का भी प्रभाव माना जा रहा है।
उद्योग संगठनों का कहना है कि हाल के वर्षों में निर्यात आंकड़े दर्ज करने की प्रणाली भी बेहतर हुई है। पहले जो निर्यात पूरी तरह रिकॉर्ड नहीं हो पाता था, वह अब आंकड़ों में शामिल हो रहा है। इससे भी कुछ राज्यों की वृद्धि दर असाधारण दिखाई दे रही है।
तीन लाख करोड़ के लक्ष्य की तैयारी:
राज्य सरकार अगले कुछ वर्षों में निर्यात को तीन लाख करोड़ रुपये से ऊपर ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत ओडीओपी को वैश्विक बाजार से जोड़ना, नए एक्सपोर्ट हब और लॉजिस्टिक पार्क विकसित करना, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को एयर कार्गो हब बनाना, डिफेंस कॉरिडोर, डाटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और निर्यातकों के लिए डिजिटल सिंगल विंडो व्यवस्था और प्रोत्साहन योजनाएं लागू करना है।
प्रमुख चुनौतियां:
गुजरात व महाराष्ट्र की तुलना में समुद्री बंदरगाहों का अभाव
निर्यात लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च अपेक्षाकृत अधिक
एमएसएमई निर्यातकों की सीमित वैश्विक पहुंच
उत्पाद विविधीकरण की जरूरत
उच्च तकनीक व इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का अभी सीमित हिस्सा
वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा और गैर टैरिफ बाधाएं
प्रमुख निर्यातक राज्य
राज्य वृद्धि(साभार एजेंसी)
