(नई दिल्ली)15जून,2026
बीते वित्त वर्ष (2025-26) के दौरान भारत ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 100 लाख टन से ज्यादा यूरिया का विदेश से आयात किया था। मांग और उत्पादन की इस खाई को पाटने के लिए देश में जल्द दो नए यूरिया कारखानों में उत्पादन शुरू होगा। यह जानकारी रसायन और उर्वरक मंत्रालय के हवाले से सामने आई है। मंत्रालय ने बताया है कि इन दोनों यूरिया कारखानों की कुल सालाना उत्पादन क्षमता 25.4 लाख टन है।
इन दो कारखानों के माध्यम से तैयार यूरिया के लिए आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने उर्वरक सप्लाई के मोर्चे पर मोदी सरकार के 12 साल की पहलों और कदमों को गिनाया, जो भारत का खाद के लिए आत्मनिर्भर और किसानों को सप्लाई चेन में उथल-पुथल से बचाने पर केंद्रित है। मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी तनाव के चलते उर्वरकों की कीमतों में उछाल, एलएनजी गैस की कमी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर काम कर पर्याप्त उर्वरक सप्लाई तय करने का काम किया है।
12 सालों में 6 नए युरिया कारखाने
बीते 12 सालों का जिक्र करतके हुए मंत्रालय ने बताया कि साल 2014 से अब तक 6 नए युरिया कारखाने विकसित किए था। इन कारखानों ने घरेलू उत्पादन क्षमता को 76.2 लाख टन और बढ़ाया है। अब दो नए कारखाने कुल यूरिया उत्पादन को 25.4 लाख टन बढ़ाएंगे।
मंत्रालय ने बताया है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का अनुमान 383.9 लाख मीट्रिक टन है। इसके खिलाफ सरकार के पास 195.79 लाख मीट्रिक टन खाद भंडार उपलब्ध है। दूसरे शब्दों में कहें तो कुल खरीफ खाद मांग को पूरा करने के लिए 51 फीसदी भंडार मौजूद है। आमतौर पर मांग के 33 फीसदी हिस्से का भंडारण किया जाता है।(साभार एजेंसी)
