(लखनऊ,UP)30जून,2026
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब राजस्व विभाग से जुड़े काम के लिए लोगों को तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जानकारी के अनुसार, 1 जुलाई से प्रदेश के सभी जिलों में लेखपाल ग्राम सचिवालयों में बैठेंगे। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम सचिवालय बनेंगे वन स्टॉप सर्विस सेंटर:
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, पंचायतीराज विभाग के तहत ग्राम सचिवालयों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को एक ही स्थान पर सभी सेवाएं उपलब्ध कराना है। अब लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों को रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए ‘वन स्टॉप सर्विस सेंटर’ के रूप में काम करेंगे।
गांव में ही मिलेंगी कई सेवाएं:
ग्राम सचिवालयों में पंचायत सहायकों के माध्यम से राजस्व विभाग की करीब 10 प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं दी जाती हैं। इनमें आय, जाति, निवास और हैसियत प्रमाण पत्र के साथ-साथ खतौनी की नकल जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं। लेखपाल के गांव में ही मौजूद रहने से इन कार्यों का समय पर और तेजी से निस्तारण हो सकेगा।
प्रमाण पत्रों के अलावा, लेखपाल प्रशासनिक व्यवस्था की एक अहम कड़ी होते हैं। राजस्व परिषद के पत्र में साफ किया गया है कि लेखपाल वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निपटारा, कृषि गणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच और धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं। विभिन्न सरकारी योजनाओं के सत्यापन में भी उनकी रिपोर्ट जरूरी होती है।
राजस्व परिषद के अनुसार, इससे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित जगह या व्यवस्था नहीं थी। इस कारण ग्रामीणों को लेखपाल से मिलने के लिए बार-बार तहसील या अन्य जगहों पर जाना पड़ता था, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। 1 जुलाई से रोस्टर प्रणाली लागू होने के बाद आम जनता की यह परेशानी दूर हो जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे आमजन को राहत मिलेगी और राजस्व विभाग के कामकाज में अधिक पारदर्शिता व जवाबदेही आएगी। (साभार एजेंसी)
