भारत-जापान में AI से लेकर रक्षा सहयोग तक सहयोग पर सहमति

National

(नई दिल्ली)02जुलाई,2026.

भारत और जापान ने गुरुवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), धातु, ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति जताई है। दोनों एशियाई देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के मकसद से इस दिशा में कदम उठाया गया है।

जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची ने क्या कहा?:
ये समझौते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच हुई बातचीत के बाद किए गए। ताकाइची तीन दिन की भारत यात्रा पर नई दिल्ली आई हैं। ताकाइची ने बातचीत के बाद पत्रकारों से कहा, जापान और भारत एक-दूसरे की ताकत का उपयोग करते हुए साथ मिलकर मजबूत और समृद्ध बनेंगे। आज के अशांत अंतरराष्ट्रीय माहौल में ऐसा सहयोगी और पूरक संबंध बनाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में ताकाइची ने क्या कहा?:
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने घोषणा की कि जापान और भारत के बीच निजी क्षेत्र के 129 सहयोग समझौते हुए हैं, जिनमें दो ट्रिलियन जापानी येन से अधिक का निवेश शामिल है। साथ ही दोनों देशों ने मिलकर करीब चार लाख टन वार्षिक क्षमता वाली हरित अमोनिया उत्पादन परियोजना विकसित करने की भी घोषणा की है।

भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए ताकाइची ने इन घोषणाओं को दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा सहयोग में एक नया मील का पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि यह हरित अमोनिया परियोजना ऊर्जा सुरक्षा सहयोग में एक नए अध्याय का प्रतीक बनेगी।
उन्होंने कहा, हमारा सहयोग अब केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इस साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसमें शामिल हितधारकों की संख्या भी बढ़ रही है, जिसमें स्टार्टअप और छोटे एवं मध्यम उद्यम भी शामिल हैं।
ताकाइची ने कहा, इस अवसर पर हम निजी क्षेत्र में लगभग 129 सहयोग समझौतों की घोषणा करते हैं, जिनके साथ 2 ट्रिलियन येन से अधिक का निवेश जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत-जापान सहयोग का सबसे अहम स्तंभ है।
उन्होंने पिछले महीने हुए जी7 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि जापान ने मुक्त और पारदर्शी ऊर्जा व्यापार, ऊर्जा भंडार को मजबूत करने और ऊर्जा उत्पादक एवं उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने कहा कि जापान की पावर एशिया पहल के तहत दोनों देश नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे, जिसमें पेट्रोलियम भंडारण को मजबूत करना भी शामिल है, ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त बनाया जा सके।
उन्होंने कहा, पावर एशिया पहल के माध्यम से हम इस दृष्टिकोण को वास्तविक कार्रवाई में बदल रहे हैं। आगे चलकर जापान और भारत नए सहयोग क्षेत्रों, जैसे पेट्रोलियम भंडारण को मजबूत करने के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मिलकर सशक्त करेंगे।
उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत को अफ्रीका में अपने विस्तार के आधार के रूप में उपयोग कर रही हैं। मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत (एफओआईपी) ढांचे के तहत हम इस नए विकास मॉडल को वैश्विक दक्षिण के देशों तक बढ़ाएंगे, जिसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि जापान और भारत मिलकर मजबूत और अधिक समृद्ध बनने के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएंगे।

जापान ने किया था भारत में 61 अरब डॉलर के निवेश का वादा:
उनकी यह यात्रा पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो यात्रा के बाद हुई है। तब जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में अपने निवेश को 61 अरब डॉलर से अधिक तक दोगुना करने का वादा किया था। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं।

भारत-जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार कितना है?:
विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक, सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान का भारत में निवेश 3.2 अरब डॉलर रहा। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार और निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, नई तकनीक और लोगों के बीच संबंध जैसे सभी क्षेत्रों पर व्यापक बातचीत की। दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तीन अहम दस्तावेजों को अपनाया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान की सटीक तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता मिलकर वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास को नई गति और ताकत देंगे।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में अपने पहले सह-विकास परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका भी इस क्वाड समूह के अन्य सदस्य हैं, जिसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने वाला माना जाता है।

भारत के सबसे बड़े निवेशकों में से एक है जापान:
जापान भारत के सबसे बड़े निवेशकों में से एक है। उसने मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का समर्थन किया है। जापानी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों में निवेश भी बढ़ाया है, जिसमें यस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 1.6 अरब डॉलर का हालिया सौदा भी शामिल है।

पहले कब-कब मिले पीएम मोदी और उनकी जापानी समकक्ष?:
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने जून 2026 में फ्रांस के इवियान-लेस-बेंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची से मुलाकात की थी। इससे पहले दोनों नेता नवंबर 2025 में जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। उससे पहले अक्तूबर 2025 में फोन पर बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने ताकाइची को पदभार संभालने पर बधाई दी थी।

दोनों देशों के बीच 70 से अधिक संवाद तंत्र मौजूद:
2027 में राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ से पहले दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, आर्थिक सुरक्षा, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच 70 से अधिक संवाद तंत्र मौजूद हैं। इसके अलावा विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, विदेश सचिव स्तर पर नियमित उच्च स्तरीय बैठकें होती रहती हैं। प्रमुख तंत्रों में 2+2 बैठक, रणनीतिक संवाद, रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक, आर्थिक सुरक्षा संवाद और एक्ट ईस्ट फोरम शामिल हैं।

इस वर्ष 16 जनवरी को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के बीच 18वां विदेश मंत्रियों का रणनीतिक संवाद हुआ था। दोनों नेताओं ने मई 2026 में क्वाड बैठक के दौरान फिर मुलाकात की थी। अप्रैल 2026 में विदेश मंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों पर चर्चा के लिए एजेक प्लस बैठक में भाग लिया था। पेट्रोलियम मंत्री नवंबर 2025 में जापान की यात्रा पर गए थे।(साभार एजेंसी)

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