योगी कैबिनेट ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय

UP / Uttarakhand

(लखनऊ,UP)24मार्च,2026.

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। इसमें 39 प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 37 प्रस्तावों पर मोहर लगी। जबकि 2 प्रस्तावों (प्रस्ताव संख्या 20 और 21) को स्थगित कर दिया गया है। बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रदेश के किसान रहे। सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद की नीति स्पष्ट कर दी है, जिससे अन्नदाताओं की आय में सीधा इजाफा होगा

वहीं, कृषि मंत्री ने कहा कि उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल अलग से दिया जाएगा। किसानों ने इस साल प्रदेश के भीतर काफ़ी अच्छी फसल लगाई है। कृषि विभाग ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में बीज भी उपलब्ध कराए हैं। पर्याप्त मात्रा में इसकी खरीद की जाए, जिससे किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़े।

औद्योगिक विकास प्राधिकरण सेवा नियमावली-2026 को मंजूरी, वेतन व सेवा शर्तों में एकरूपता
प्रदेश मंत्रिपरिषद ने राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयकृत सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026” को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के साथ वर्ष 2018 में लागू नियमावली में व्यापक संशोधन का रास्ता साफ हो गया है।

सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विभिन्न औद्योगिक प्राधिकरणों, विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बीच वेतनमान, भत्तों और सेवा शर्तों में मौजूद असमानताओं को खत्म करना है। नई नियमावली लागू होने के बाद इन संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों को समान अवसर और बेहतर सेवा संरचना मिल सकेगी।

प्रस्ताव के अनुसार, 2018 की नियमावली में समय-समय पर किए गए संशोधनों के बावजूद कई विसंगतियां बनी हुई थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह द्वितीय संशोधन लाया गया है। संशोधित नियमावली के तहत सेवा शर्तों को अधिक स्पष्ट, संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।

कैबिनेट के इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होगी, बल्कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली भी अधिक सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनेगी। सरकार का मानना है कि एकरूप सेवा ढांचा निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

राज्य सरकार लंबे समय से औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो प्राधिकरणों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और निवेश-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

निजी बिजनेस पार्क नीति-2025 को कैबिनेट की मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025’ को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस फैसले से प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे निवेश आकर्षण, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

योजना के तहत प्रदेश में ऐसे आधुनिक बिजनेस पार्क स्थापित किए जाएंगे, जहां वैश्विक कंपनियों के लिए कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र, लॉजिस्टिक्स हब, साझा सेवाएं और संचालन सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। सरकार का मानना है कि रेडी-टू-यूज अवसंरचना की उपलब्धता से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी और लागत वृद्धि को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

वर्तमान में उपयुक्त और तैयार औद्योगिक अवसंरचना के अभाव में निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतरने में समय लगता है, जिससे निवेशकों की रुचि प्रभावित होती है। इस योजना के माध्यम से इस समस्या का समाधान करते हुए राज्य को निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और स्टार्टअप्स को भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त कार्यस्थल उपलब्ध होंगे, जिससे औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

योजना के क्रियान्वयन के लिए DBFOT (डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण) मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि के लिए विकसित किया जाएगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त 45 वर्षों तक बढ़ाया भी जा सकता है। रियायत अवधि समाप्त होने के बाद विकसित परिसंपत्तियां राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।

भूमि प्रबंधन के तहत प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि चिन्हित की जाएगी, जबकि विशेष स्थानों पर भूमि की उपलब्धता और उपयोगिता के आधार पर इसमें लचीलापन रखा जाएगा। योजना की वित्तीय संरचना में अपफ्रंट लैंड प्रीमियम, राजस्व साझेदारी और अन्य वित्तीय प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित की जा सके।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरणों या सरकारी भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों को नोडल भूमिका दी जाएगी। ये एजेंसियां आवेदन आमंत्रित करने, बोली प्रक्रिया संचालित करने और प्रस्तावों के तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके लिए एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाएगा, जो निर्धारित मानकों के आधार पर प्रस्तावों का परीक्षण कर अंतिम अनुशंसा करेगी।

इसके अलावा, चयनित डेवलपर्स को परियोजना की प्रगति, व्यय और निर्धारित समयसीमा के अनुपालन की नियमित रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को प्रस्तुत करनी होगी, जिससे परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

गंगा एक्सप्रेसवे किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर को कैबिनेट की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लेते हुए गंगा एक्सप्रेसवे के समीप इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत संभल जनपद में आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

यूपीडा द्वारा विकसित विभिन्न एक्सप्रेस-वे आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे कुल 29 स्थानों पर ऐसे क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में संभल में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक क्लस्टर परियोजना के अंतर्गत सड़क, आरसीसी नाली, तालाब, आरएमसी प्लांट, फायर स्टेशन, ओवरहेड जलाशय, वाटर सप्लाई लाइन, फेंसिंग, विद्युत एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत 293.59 करोड़ रुपये है, जबकि व्यय वित्त समिति द्वारा 245.42 करोड़ रुपये की धनराशि को अनुमोदित किया गया है, जिसे अब कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और एक्सप्रेसवे के किनारे आर्थिक विकास के नए केंद्र विकसित होंगे।

ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ में विकसित होगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “उत्तर प्रदेश मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024” के तहत ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना के लिए 174.12 एकड़ भूमि के आवंटन से संबंधित नियमों और शर्तों सहित प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी दे दी है। यह भूमि सेक्टर-कप्पा-02, ग्रेटर नोएडा में स्थित है और परियोजना को राज्य की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क परियोजना में न्यूनतम 1000 करोड़ का निवेश अनिवार्य होगा। पात्र निवेशकों को नीति-2024 के तहत 30 प्रतिशत तक फ्रंट-एंड भूमि सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह सब्सिडी केवल औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार द्वारा लीज पर आवंटित भूमि पर ही अनुमन्य होगी। भूमि का आरक्षित मूल्य 11,000 प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है और सब्सिडी की गणना इसी आरक्षित मूल्य के आधार पर की जाएगी।

सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस परियोजना के लिए भूमि आवंटन ई-ऑक्शन मॉडल के माध्यम से करेगा। निविदा प्रक्रिया में भारत में पंजीकृत साझेदारी फर्म, सीमित देयता साझेदारी , निजी लिमिटेड तथा सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियां भाग ले सकेंगी, जबकि कंसोर्टियम अथवा संयुक्त उद्यम को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। इससे परियोजना के लिए एकल और सक्षम निवेशक का चयन सुनिश्चित किया जाएगा।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत शर्तों के अनुसार चयनित डेवलपर को परियोजना को सात वर्षों की निर्धारित अवधि में पूर्ण करना होगा। साथ ही, शुरुआती तीन वर्षों में न्यूनतम 40 प्रतिशत विकास कार्य पूरा करना अनिवार्य रहेगा। यदि वास्तविक और उचित कारणों से देरी होती है, तो नियमानुसार अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा। परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने तथा निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं की पूर्ति तक आवंटी को परियोजना से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी।

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा 9 फरवरी 2026 को हुई बैठक में इस परियोजना से संबंधित नियमों और शर्तों को अनुमोदित किया गया था, जिसका कार्यवृत्त 6 मार्च 2026 को निर्गत किया गया। इसके बाद औद्योगिक विकास विभाग, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बोर्ड तथा मूल्यांकन समिति की संस्तुतियों के क्रम में प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

राज्य सरकार का मानना है कि इस मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क के विकसित होने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन जैसी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके साथ ही परिवहन लागत में कमी आएगी और निर्यात-उन्मुख गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

नीति-2024 के तहत राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करना है। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित यह एमएमएलपी परियोजना उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से औद्योगिक निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर सृजित करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने की उम्मीद की जा रही है।

डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित होंगे प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के अंतर्गत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स के विकास हेतु वर्ष 2026 की योजना को मंजूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में औद्योगिकीकरण की गति तेज करना, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को शीघ्र उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के लक्ष्य तक पहुंचाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान “लीज एवं बिल्ड” मॉडल में उद्यमियों को भूमि प्राप्त करने के बाद भवन, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी तथा अग्निशमन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18 से 36 महीने तक का समय लग जाता है। नई योजना के तहत इन चुनौतियों को कम करने के लिए पहले से विकसित औद्योगिक शेड उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया तेज होगी।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स के माध्यम से भूमि-आधारित औद्योगिक विकास को अधिक तेज, कुशल और रोजगारोन्मुख बनाना है। इसके साथ ही राज्य सरकार भूमि का स्वामित्व अपने पास रखते हुए निजी निवेश से अवसंरचना विकसित कराएगी। इससे उद्योगों की प्रारंभिक लागत कम होगी और उत्पादन शीघ्र प्रारंभ किया जा सकेगा।

योजना के तहत विकसित शेड्स में प्रमुख रूप से मेटल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल/गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, डिफेंस एयरोस्पेस तथा ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र-विशिष्ट आरक्षण तथा सीमित सहायक सुविधाएं भी प्रदान कर सकेगा।

डीबीएफओटी मॉडल के अंतर्गत निजी डेवलपर डिजाइन, वित्त, निर्माण, संचालन तथा हस्तांतरण का कार्य करेगा। इस योजना में कन्सेशन अवधि 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। पायलट परियोजनाओं के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि न्यूनतम भूमि आकार 10 एकड़ प्रस्तावित है। परियोजना की अवधि पूर्ण होने अथवा समाप्ति की स्थिति में सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

योजना के अंतर्गत न्यूनतम विकास दायित्व (एमडीओ) निर्धारित किए गए हैं, ताकि भूमि का अनावश्यक संचयन (होर्डिंग) रोका जा सके तथा समयबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय दृष्टि से भी योजना को राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल प्रूडेंस) के अनुरूप तैयार किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की बजटीय सहायता, व्यवहार्यता अंतर अनुदान (वीजीएफ) अथवा राज्य सरकार की गारंटी प्रदान नहीं की जाएगी तथा राज्य पर कोई आकस्मिक देयता भी नहीं होगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क तथा राजस्व साझेदारी (रेवेन्यू शेयर) के माध्यम से आय प्राप्त होगी।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, निवेश आकर्षित होगा, उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

प्राधिकरणों से नक्शा पास होते ही माना जाएगा भू-उपयोग परिवर्तन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन के लिए अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस अहम फैसले के तहत विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है।

अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। अगर किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो उसी को भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा। इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया यानी पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही सभी औपचारिकताएं शामिल कर दी गई हैं। इससे न केवल आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। इस सुधार से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग स्थापना में तेजी आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित होंगे प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के अंतर्गत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स के विकास हेतु वर्ष 2026 की योजना को मंजूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में औद्योगिकीकरण की गति तेज करना, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को शीघ्र उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के लक्ष्य तक पहुंचाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान “लीज एवं बिल्ड” मॉडल में उद्यमियों को भूमि प्राप्त करने के बाद भवन, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी तथा अग्निशमन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18 से 36 महीने तक का समय लग जाता है। नई योजना के तहत इन चुनौतियों को कम करने के लिए पहले से विकसित औद्योगिक शेड उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया तेज होगी।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स के माध्यम से भूमि-आधारित औद्योगिक विकास को अधिक तेज, कुशल और रोजगारोन्मुख बनाना है। इसके साथ ही राज्य सरकार भूमि का स्वामित्व अपने पास रखते हुए निजी निवेश से अवसंरचना विकसित कराएगी। इससे उद्योगों की प्रारंभिक लागत कम होगी और उत्पादन शीघ्र प्रारंभ किया जा सकेगा।

योजना के तहत विकसित शेड्स में प्रमुख रूप से मेटल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल/गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, डिफेंस एयरोस्पेस तथा ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र-विशिष्ट आरक्षण तथा सीमित सहायक सुविधाएं भी प्रदान कर सकेगा।

डीबीएफओटी मॉडल के अंतर्गत निजी डेवलपर डिजाइन, वित्त, निर्माण, संचालन तथा हस्तांतरण का कार्य करेगा। इस योजना में कन्सेशन अवधि 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

पायलट परियोजनाओं के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि न्यूनतम भूमि आकार 10 एकड़ प्रस्तावित है। परियोजना की अवधि पूर्ण होने अथवा समाप्ति की स्थिति में सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

योजना के अंतर्गत न्यूनतम विकास दायित्व (एमडीओ) निर्धारित किए गए हैं, ताकि भूमि का अनावश्यक संचयन (होर्डिंग) रोका जा सके तथा समयबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय दृष्टि से भी योजना को राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल प्रूडेंस) के अनुरूप तैयार किया गया है। इस योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की बजटीय सहायता, व्यवहार्यता अंतर अनुदान (वीजीएफ) अथवा राज्य सरकार की गारंटी प्रदान नहीं की जाएगी तथा राज्य पर कोई आकस्मिक देयता भी नहीं होगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क तथा राजस्व साझेदारी (रेवेन्यू शेयर) के माध्यम से आय प्राप्त होगी।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, निवेश आकर्षित होगा, उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

12 से अधिक कंपनियों को निवेश के लिए दी जाएगी प्रोत्साहन राशि
कैबिनेट की बैठक में 12 से अदिक कंपनियों को राज्य में निवेश करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि देने संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें विदेशी निवेश करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों को एफडीआइ व अन्य नीतियों के तहत भूमि व एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में सब्सिडी दी जाएगी।

एफडीआइ व एफसीआइ नीति,फाच्र्यून ग्लोबल-500 व फाच्र्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 819.11 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर हैवेल्स इंडिया लमिटेड को, 209.14 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर विजन सोर्स एलएलपी को, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 708.82 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर मेसर्स इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड व टीआइ मेडिकल्स को 215.20 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर भूमि पर सब्सिडी दिए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट वे स्वीकृति दी है।

इसके अलावा अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत मेगा परियोजना की श्रेणी में मेसर्स गैलेन्ट इस्पात लिमिटेड को 56.36 करोड़ रुपये की राशि जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में जारी किए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने दी है। वहीं त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति -2020 के तहत इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुति पर कोविड-19 महामारी के कारण उद्योगों के विकास के लिए गोरखपुर की कंपनी अंकुर उद्योग को 55.93 करोड़ रुपये की राशि एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में किए जाने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत गोरखपुर की गैलेन्ट इस्पात लिमिटेड को 25.62 करोड़, मेरठ की मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड को 1.08 करोड़ रुपये एसटीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में दिए जाने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है।

वहीं उत्तर प्रदेश औद्योगिक नवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत अयोध्या में पक्का लिमिटेड को 676.26 करोड़ रुपये, गैलेन्ट इस्पात को गोरखपुर में 765.11 करोड़ रुपये, रिलायंस सीमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को रायबरेली में 550.31 करोड़ रुपये, फतेहपुर में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को 776.35 व मीरजापुर में 772.26 करोड़ रुपये व सीतापुर में रेडिको खेतान लिमिटेड को 591.14 करोड़ रुपये का मेगा सुपर श्रेणी में निवेश करने को लेकर लेटर आफ कंफर्ट जारी करने की स्वीकृति दी गई है। साथ ही मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को सोनभद्र में इकाई की स्थापना को लेकर 9.37 करोड़ रुपये की एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति देने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

बीडा में होगी कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण केन्द्रीयित सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सभी विकास प्राधिकरणों की तरह ही बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को भी नियमावली के दायरे में लाया गया है। इससे बीडा में कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

प्राधिकरणों से नक्शा पास होते ही माना जाएगा भू-उपयोग परिवर्तन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन के लिए अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस अहम फैसले के तहत विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है। अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी।

अगर किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो संबंधित भूमि का भू-उपयोग वही हो जाएगा, जिस उपयोग के लिए नक्शा पास किया गया है। इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया यानी पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी। राज्य सरकार के इस फैसले से उद्योग लगाने या फिर कारोबार करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही सभी औपचारिकताएं शामिल कर दी गई हैं। इससे न केवल आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। इस सुधार से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग स्थापना में तेजी आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

अभी तक नक्शा पास करवाने के लिए भू-उपयोग परिवर्तन था अनिवार्य
इस तरह से प्रदेश सरकार ने कारोबारी सुगमता के तहत यूपी में उद्योग लगाने या फिर इसी तरह का अन्य कारोबार करने के लिए कृषि भूमि को अकृषि कराने से राहत दे दी है। ऐसी भूमि का भू-उपयोग बदले बिना ही नक्शा पास किया जाएगा।

राजस्व संहिता की धारा-80 में दी गई व्यवस्था के मुताबिक कृषि भूमि का अन्य किसी भी उपयोग में लाने के लिए उसे भू-उपयोग बदलवाते हुए अकृषि कराने की अनिवार्यता थी। कृषि भूमि को अकृषि कराए बिना इस पर कोई भी नक्शा पास नहीं हो सकता था। यूपी में देश-विदेश की कंपनियां निवेश कर रही हैं। कृषि भूमि का खेती के अलावा अन्य में उपयोग में लाने की जरूरत पड़ रही है। इसीलिए कृषि भूमि पर नक्शा पास कराने से पहले इसका भू-उपयोग बदलवना पड़ रहा था। इसमें काफी समय लग रहा था और औद्योगिक गतिविधियां समय से शुरू नहीं हो पा रही थीं।

12 से अधिक कंपनियों को निवेश के लिए दी जाएगी प्रोत्साहन राशि
कैबिनेट की बैठक में 12 से अधिक कंपनियों को राज्य में निवेश करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत प्रोत्साहन राशि देने संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें विदेशी निवेश करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों को एफडीआइ व अन्य नीतियों के तहत भूमि व एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में सब्सिडी दी जाएगी।

एफडीआइ व एफसीआइ नीति,फार्च्यून ग्लोबल-500 व फाच्र्यून इंडिया-500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 819.11 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर हैवेल्स इंडिया लमिटेड को, 209.14 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर विजन सोर्स एलएलपी को, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 708.82 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर मेसर्स इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड व टीआइ मेडिकल्स को 215.20 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर भूमि पर सब्सिडी दिए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट वे स्वीकृति दी है।

इसके अलावा अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत मेगा परियोजना की श्रेणी में मेसर्स गैलेन्ट इस्पात लिमिटेड को 56.36 करोड़ रुपये की राशि जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में जारी किए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने दी है। वहीं त्वरित निवेश प्रोत्साहन नीति -2020 के तहत इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुति पर कोविड-19 महामारी के कारण उद्योगों के विकास के लिए गोरखपुर की कंपनी अंकुर उद्योग को 55.93 करोड़ रुपये की राशि एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में किए जाने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत गोरखपुर की गैलेन्ट इस्पात लिमिटेड को 25.62 करोड़, मेरठ की मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड को 1.08 करोड़ रुपये एसटीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में दिए जाने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है।

वहीं उत्तर प्रदेश औद्योगिक नवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत अयोध्या में पक्का लिमिटेड को 676.26 करोड़ रुपये, गैलेन्ट इस्पात को गोरखपुर में 765.11 करोड़ रुपये, रिलायंस सीमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को रायबरेली में 550.31 करोड़ रुपये, फतेहपुर में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड को 776.35 व मीरजापुर में 772.26 करोड़ रुपये व सीतापुर में रेडिको खेतान लिमिटेड को 591.14 करोड़ रुपये का मेगा सुपर श्रेणी में निवेश करने को लेकर लेटर आफ कंफर्ट जारी करने की स्वीकृति दी गई है। साथ ही मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को सोनभद्र में इकाई की स्थापना को लेकर 9.37 करोड़ रुपये की एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति देने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

बीडा में होगी कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण केन्द्रीयित सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सभी विकास प्राधिकरणों की तरह ही बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को भी नियमावली के दायरे में लाया गया है।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि घाटमपुर में 660-660 मेगावॉट की तीन इकाइयां मंजूर हैं। इनमें से दो इकाइयां संचालित हैं जबकि तीसरी का संचालन जल्द शुरू हो जाएगा। यह ब्लॉक नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (यह यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड व एनएलसी इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है) को आवंटित किया गया था।

उन्होंने बताया कि अब तक घाटमपुर के लिए हम जहां से कोयला ला रहे थे वह ट्रांसपोर्ट की वजह से महंगा पड़ रहा था। इससे बिजली की उत्पादन लागत बढ़ रही थी। अब जब पछवारा दक्षिण कोयला ब्लॉक का विकास हो जाएगा और वहां से निकलने वाला कोयला लाया जा सकेगा तो इससे बिजली के उत्पादन की लागत कम हो जाएगी। विभाग का आकलन है कि उत्पादन लागत में 80 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी आएगी।

पछवारा की खदान से निकलने वाला कोयला भी अच्छी क्वॉलिटी का है। इससे भी उत्पादन की लागत पर असर आएगा। वहां से 270 मिलियन टन कोयले के निकासी का अनुमान है। वर्तमान में कोल ब्लॉक का माइनिंग ऑपरेशन चल रहा है। बीते साल दिसंबर में इसकी शुरुआत हुई थी। वहीं, इस साल अगस्त से कोयले की निकासी होने की उम्मीद है।

गोरखपुर के चिलुआताल पर लगेगा फ्लोटिंग सोलर प्लांट
गोरखपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। योगी कैबिनेट ने सोमवार को शहर के चिलुआताल में 20 मेगावॉट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट विकसित करने को मंजूरी दे दी। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि गोरखपुर में सदर तहसील स्थित चिलुआताल पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की स्थापना के लिए 80 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसके लिए पर्यटन विभाग, राजस्व विभाग और एचयूआरएल के स्वामित्व के अधीन जलमग्न भूमि का उपयोग किया जा रहा है। प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर विद्युत उत्पादन परियोजना की स्थापना के लिए पर्यटन विभाग के स्वामित्व की 11.4181 हेक्टेअर (28.20 एकड़) भूमि उपयोग किए जाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड को निशुल्क आवंटित किया जाना है।

कोल इंडिया लिमिटेड इस फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की स्थापना अपने स्रोतों से करेगी। परियोजना से हर साल न्यूनतम 33.29 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा। सोलर सिटी उस शहर को कहा जाता है जहां पांच वर्ष के अंत में पारंपरिक ऊर्जा की अनुमानित मांग में न्यूनतम 10 प्रतिशत की कमी अक्षय ऊर्जा संयंत्रो की स्थापना और ऊर्जा दक्षता उपायों के माध्यम से प्राप्त की जाए। गोरखपुर शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने हेतु 10 प्रतिशत यानी, 121.8 मिलियन यूनिट ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा संयंत्रो की स्थापना से प्राप्त किया जाना है।

संभल में 300 करोड़ से होगा 24 कोसी परिक्रमा पक्के मार्ग का निर्माण
कैबिनेट ने धर्मार्थ योजना के तहत संभल में 24 कोसी वंश गोपाल तीर्थ परिक्रमा मार्ग के नवनिर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वहां प्रत्येक माह 24 कोसी परिक्रमा आयोजित होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये होगी।

वर्तमान में पक्का मार्ग उपलब्ध न होने के कारण श्रद्धालुओं को कच्चे व कीचड़युक्त मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उन्हें अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस महत्वपूर्ण धार्मिक परिक्रमा मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए लंबे समय से मांग की जा रही थी।

प्रस्तावित कार्य में मार्ग का नवनिर्माण, चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में आसानी होगी। साथ ही क्षेत्र के आसपास स्थित ग्रामों व कस्बों को करीब 7.00 मीटर चौड़े मार्ग से सीधा संपर्क मिलेगा। इससे किसानों को अपनी फसलों व कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा होगी। क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने, स्थानीय ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने और जनसुविधाओं में व्यापक सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

बागपत में दोगुनी क्षमता की स्थापित होगी नई चीनी मिल
उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड, लखनऊ की अधीनस्थ दि किसान सहकारी चीनी मिल, बागपत की पेराई क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़ाकर 5000 टीसीडी की नई चीनी मिल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है।
इस परियोजना से पुराने हो चुके जर्जर प्लांट और पुरानी तकनीक पर आधारित होने के कारण हो रही तकनीकी नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

नई तकनीक पर आधारित चीनी मिल के संचालन से लाभ प्राप्त किए जाने में मदद मिलेगी। दि गन्ना किसान सहकारी चीनी मिल, बागपत क्षेत्र के गन्ना किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने, आय दोगुनी किए जाने और समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किए जाने में मदद मिलेगी।

लोक सेवा अधिकरण में सेवानिवृत्ति की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ी
कैबिनेट ने उप्र लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में इजाफा करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष 67 वर्ष की आयु तक, जबकि सदस्य 65 वर्ष आयु तक सेवारत रह सकेंगे। यह व्यवस्था पहले से लागू थी, जिसमें बीते दिनों बदलाव कर सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को कम कर दिया गया था। कैबिनेट ने पुरानी व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मंजूरी दे दी है।

सुरक्षा शाखा खरीदेगा 23 वाहन
कैबिनेट ने प्रदेश पुलिस की सुरक्षा शाखा को 23 वाहन खरीदने के गृह विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सुरक्षा शाखा के निष्प्रयोज्य हो चुके 23 वाहनों के स्थान पर नए वाहनों को खरीदा जाएगा। इससे प्रदेश में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा कार्यों को अंजाम देने में मदद मिलेगी।

बाेरे खरीदने को अतिरिक्त धनराशि
कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत भारत सरकार के प्राप्त आवंटन के अनुरूप 87 हजार गांठ जूट बोरा खरीदने के लिए कम पड़ रही धनराशि की वित्तीय स्वीकृति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

यूपी के 58 छोटे शहर भी बनेंगे स्मार्ट सिटी, मिलेंगी सभी सुविधाएं
प्रदेश में बड़े शहरों की तर्ज पर अब छोटे शहरों का कायाकल्प किया जाएगा। नगर निगमों की तरह छोटे जिला मुख्यालय वाले 58 नगर निकायों को भी स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ‘नवयुग पालिका योजना’ लागू करने जा रही है। इससे संबंधित नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी गई है। इस नई योजना के तहत गौतमबुद्ध नगर के दादरी समेत कुल 55 नगर पालिका परिषद और तीन नगर पंचायतों के विकास पर पांच साल में 2916 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने इस फैसले के जरिए

सीएम की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक इस योजना के तहत 58 जिला मुख्यालयों के नगरीय निकायों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। पहले चरण में जिला मुख्यालय वाले 55 नगर पालिका परिषदों के साथ ही तीन नगर पंचायतों में इस योजना को लागू किया जाएगा।

इन निकायों के विकास पर सलाना 583.20 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। योजना के तहत इन निकायों में शहरी सुविधाओं से संबंधित विकास के काम कराए जाएंगे। इस योजना के तहत खर्च होने वाली पूरी धनराशि प्रदेश सरकार ही वहन करेगी। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले जहां स्मार्ट सॉल्यूशन्स से डिजिटल गवर्नेन्स को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

सरकार का मानना है कि इस योजना के जरिए जिला मुख्यालयों में निवेश करने से आर्थिक विकास, बुनियादी सुविधाएं, जीवन की गुणवत्ता में सुधार पूरे प्रदेश में समान रूप से विस्तारित होगा। इन शहरों के लोगों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार होगा। स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं लोगों को उपलब्ध होंगी।

प्रस्ताव के मुताबिक वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पांच साल में इन शहरों में सुविधाएं देने का काम किया जाएगा। जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से कामों का चयन किया जाएगा। इसके बाद राज्य स्तरीय तकनीकी समिति के परीक्षण के बाद सक्षम स्तर से परियोजनाओं को अनुमोदित किया जाएगा।

5 वर्षों में खर्च होगा 2916 करोड़
योजना के तहत प्रत्येक वर्ष 583.20 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी, इस तरह 5 वर्षों (2025-26 से 2029-30) में कुल 2916 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है, जिसमें केंद्र सरकार की कोई भागीदारी नहीं होगी।

जनसंख्या के आधार पर निकाय दो श्रेणियों में विभाजित
योजना के बारे में जानकारी देते हुए नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि नवयुग पालिका योजना के तहत उत्सव भवन, ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी केंद्र, पार्कों का विकास तथा विद्युत व्यवस्था के आधुनिकीकरण जैसे कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निकायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर दो श्रेणियों (डेढ़ लाख से अधिक और डेढ़ लाख से कम आबादी) में विभाजित किया गया है, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके।(साभार एजेंसी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *