(प्रयागराज,UP)01मई,2026
गंगा नदी में घटती मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन काे लेकर केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सिफरी) प्रयागराज ने संगम तट पर 30 हजार मछलियों के अंगुलिका बीज गंगा में छोड़ा गया।
कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के तहत आयोजित किया गया। इस रैंचिंग कार्यक्रम के तहत भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों कतला, रोहू और मृगल के अंगुलिका बीज गंगा नदी में प्रवाहित किए गए। वैज्ञानिकों के अनुसार एक किलोग्राम में लगभग 66 मछलियां होती हैं, इस प्रकार कुल करीब 455 किलोग्राम मछलियों को नदी में छोड़ा गया।
वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. धर्म नाथ झा ने कहा कि गंगा नदी में घटती महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए नियमित रूप से बीज रैंचिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल मछलियों की संख्या बढ़ाना ही नहीं बल्कि लोगों को गंगा की स्वच्छता और जैव विविधता के प्रति जागरूक करना भी है।
सिफरी के केंद्राध्यक्ष डा. बीआर चव्हाण ने अपने संबोधन में गंगा नदी में मछलियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मत्स्य संसाधन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं।
मुख्य अतिथि नासी के कार्यकारी सचिव डॉ. संतोष कुमार शुक्ला ने गंगा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव सभ्यता के विकास में गंगा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। विचार मंच के प्रांत संयोजक राजेश शर्मा, डॉ. अबसार आलम, डा. वेंकटेश ठाकुर आदि उपस्थित रहे। (साभार एजेंसी)
