(नई दिल्ली)15मई,2026,2026
नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि उसने प्रश्न पत्र लीक होने की पूरी कड़ी का पता लगा लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले का मुख्य स्रोत पुणे का प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी था, जिसे शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई के मुताबिक, पी. वी. कुलकर्णी लातूर का रहने वाला है और केमिस्ट्री का डोमेन एक्सपर्ट है। वह कई वर्षों से नीट प्रश्न पत्र तैयार करने से जुड़े पैनलों में शामिल रहा है। एजेंसी का आरोप है कि कुलकर्णी ने अपने विशेष अधिकार और गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करते हुए प्रश्न पत्र लीक किया।
घर पर चलती थीं विशेष कोचिंग क्लास:
जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास आयोजित की थी। इन क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और उनके उत्तर डिक्टेट किए गए थे। सीबीआई का कहना है कि यही प्रश्न 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पूछे गए।
सीबीआई के अनुसार, इस काम में मनीषा वाघमारे नाम की आरोपी ने छात्रों को जुटाने में मदद की। मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने बताया कि छात्रों से इन विशेष क्लासों में शामिल होने के लिए कई लाख रुपये वसूले गए थे। छात्रों ने कॉपियों में प्रश्न लिखे थे और बाद में वे वास्तविक प्रश्न पत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।
ऐसे फैला पेपर लीक का नेटवर्क:
जांच में यह भी पता चला है कि पेपर लीक के बाद इसे कई लोगों के जरिए आगे फैलाया गया। सीबीआई के मुताबिक, धनंजय लोखंडे को मनीषा वाघमारे से पेपर मिला था। इसके बाद उसने यह प्रश्न पत्र नासिक के शुभम खैरनार को दिया। शुभम खैरनार ने आगे इसे यश यादव तक पहुंचाया, जिसने कई अन्य लोगों में इसे फैलाया।
इस मामले में सीबीआई ने जयपुर से मांगिलाल बीवाल, विकास बीवाल और दिनेश बीवाल को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को पकड़ा गया।
10 से 12 लाख रुपये में हुआ सौदा:
जांच एजेंसी के अनुसार, अप्रैल महीने में शुभम खैरनार ने यश यादव को बताया था कि मांगिलाल बीवाल अपने छोटे बेटे के लिए लीक प्रश्न पत्र खरीदने को तैयार है। इसके बदले 10 से 12 लाख रुपये देने की बात हुई थी।
सीबीआई का दावा है कि खैरनार ने यश यादव के साथ 500 से 600 प्रश्न साझा किए थे ताकि मेडिकल कॉलेज में सीट पाने लायक अंक सुनिश्चित किए जा सकें। अधिकारियों के अनुसार, मांगिलाल बीवाल ने यह पेपर अपने बेटे को देने के साथ-साथ रिश्तेदारों में भी बांटा था।
जांच में यह भी सामने आया कि यश यादव ने विकास बीवाल से कहा था कि वह अन्य नीट अभ्यर्थियों को भी प्रश्न बेचकर रकम की भरपाई करे।
प्वाइंट्स में समझें पेपर लीक का पूरा घटनाक्रम:
3 मई 2026 को नीट यूजी परीक्षा आयोजित हुई।
परीक्षा से पहले एक गेस पेपर वायरल हुआ, यह व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए साझा किया गया था और बाद में इसकी फोटोकॉपी भी कई जगहों पर बांटी गई।
परीक्षा वाले दिन ही कुछ छात्रों ने सीकर में इस बात की शिकायत दी।
7 मई को एनटीए को गड़बड़ी की सूचना मिली।
8 मई को मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।
मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई। राजस्थान एसओजी ने एडीजी विशाल बंसल के नेतृत्व में जांच शुरू की।
एसओजी ने खोजबीन की और कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
शुरुआती जांच में गेस पेपर सार्वजनिक रूप से प्रसारित होने की बात सामने आई।
एनटीए ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी।
मामला सीबीआई को सौंपा गया और सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
14 मई को मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे गिरफ्तार हुए।
जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से कई अन्य आरोपी पकड़े गए।
देशभर में छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
डिजिटल डिवाइस में चैट, लीक प्रश्न पत्र और अन्य सबूत मिले।
16 मई को सीबीआई ने मास्टरमाइंड पी. वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया।
पी. वी. कुलकर्णी कई वर्षों से नीट प्रश्न पत्र तैयार करने वाले पैनलों से जुड़ा था।
अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने कथित तौर पर गोपनीय प्रश्न जुटाए।
पुणे स्थित घर पर स्पेशल कोचिंग क्लास आयोजित की गई।
छात्रों को प्रश्न, विकल्प और उत्तर डिक्टेट किए गए।
मनीषा वाघमारे ने छात्रों को इन क्लासों में शामिल करवाया।
छात्रों से क्लास के लिए लाखों रुपये लिए गए।
छात्रों ने नोटबुक में प्रश्न लिखे, जो बाद में असली पेपर से मेल खाए।
मनीषा वाघमारे से धनंजय लोखंडे को पेपर मिला।
लोखंडे ने पेपर शुभम खैरनार को दिया।
शुभम खैरनार ने पेपर यश यादव तक पहुंचाया।
यश यादव ने लीक प्रश्न कई लोगों तक फैलाए।
मंगीलाल बीवाल ने बेटे के लिए लीक प्रश्न खरीदने की डील की।
10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
500-600 प्रश्न साझा किए गए ताकि अच्छे अंक सुनिश्चित हो सकें।
मंगीलाल बीवाल ने प्रश्न रिश्तेदारों में भी बांटे।
यश यादव ने और छात्रों को जोड़कर पैसे वसूलने की बात कही।
जब्त उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
सीबीआई को मिले डिजिटल सबूत:
सीबीआई ने पिछले 24 घंटों में देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी की है। एजेंसी ने कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। डिजिटल डिवाइस की जांच में कथित चैट, लीक प्रश्न पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि डिलीट किया गया डेटा भी निकाले जा सकें।
23 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा:
गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। यह परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर कराई गई थी। करीब 23 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, 7 मई की शाम को कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। इसके बाद अगले ही दिन मामले को स्वतंत्र जांच और कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया। (साभार एजेंसी )
