(नई दिल्ली)15मई,2026
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मिस्र और थाईलैंड के अपने समकक्षों से वार्ता की। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना था। उनकी चर्चाओं में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी प्रमुखता से बातचीत हुई।
ये बैठकें दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) के इतर हुईं, जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है। जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से इन बैठकों की तस्वीरें और विवरण साझा किए। उन्होंने मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलअट्टी से मुलाकात को अच्छा बताया। ब्रिक्स एफएमएम के घटनाक्रम और पश्चिम एशिया पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिहासक फुंगकेटकेओ से भी मिले। चर्चा व्यापार, कनेक्टिविटी, समुद्री और रक्षा सहित सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित थी। म्यांमार और पश्चिम एशिया पर भी विचार साझा किए गए। भारत ने ब्रिक्स देशों से भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापार व्यवधानों के प्रभावों से निपटने के व्यावहारिक तरीके खोजने को कहा। वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में संवाद और कूटनीति के महत्व को रेखांकित किया।
ब्रिक्स बैठक का महत्व
जयशंकर ने ये टिप्पणियां नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में दीं। इसमें ईरान, रूस, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। भारत द्वारा आयोजित इस बैठक का महत्व बढ़ गया है। यह समूह पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभावों से जूझ रहा है। विशेष रूप से युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान आए हैं।
इथियोपिया के साथ रणनीतिक साझेदारी
जयशंकर ने इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन टिमोथियोस हेसेबोन से भी मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल की अदीस अबाबा यात्रा के निर्णयों की समीक्षा की।आपसी हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्ष अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।(साभार एजेंसी)
