(नई दिल्ली)24जुलाई,2026
सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस पूर्व आदेश में आंशिक संशोधन किया। अदालत ने अब टीटीज़ेड प्राधिकरण को लगभग 410 लंबित आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इनमें अधिकांश आवेदन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा नए उद्योग स्थापित करने, मौजूदा इकाइयों के विस्तार या उनके स्थानांतरण की अनुमति के लिए किए गए हैं।
ताज क्षेत्र में MSME आवेदनों पर ब़ढ़ेगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) प्राधिकरण को ताजमहल के आसपास के पर्यावरण के नजरिये से संवेदनशील क्षेत्र में गैर-प्रदूषणकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की स्थापना से संबंधित करीब 400 लंबित आवेदनों पर कार्रवाई करने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवेदन की विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच की जाएगी और किसी भी आपत्ति की स्थिति में बिना अदालत की अनुमति के आवेदन मंजूर नहीं किया जाएगा।
TTZ मामलों में विशेषज्ञ निगरानी के साथ फैसले के निर्देश
चीफ जस्टिस सूर्यकांत बेंच ने कहा कि ताज ट्रेपेजियम जोन के विजन डॉक्यूमेंट, कम्युलेटिव प्रभाव आकलन (Cumulative Impact Assessment) और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा पर नीरी ( NEERI ) की अंतिम रिपोर्ट अभी लंबित हैं। लेकिन इनकी लंबित स्थिति के कारण पहले से प्राप्त आवेदनों पर विचार रोकना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि सावधानी के सिद्धांत (Precautionary Principle) का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए और आवश्यक होने पर विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष निगरानी में ही निर्णय लिए जाएं।
फैसले सार्वजनिक करने का निर्देश:
अदालत ने निर्देश दिया कि सभी निर्णय CEC की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं, ताकि आम नागरिक या पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग यदि कोई आपत्ति या सुझाव देना चाहें, तो दे सकें। अंतिम निर्णय लेने से पहले इन आपत्तियों और सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि TTZ में किसी भारी उद्योग को अनुमति देने का प्रस्ताव नहीं है। केवल गैर-प्रदूषणकारी MSMEs, जैसे आटा चक्की आदि की स्थापना के आवेदन लंबित हैं। उन्होंने कहा कि करीब 400 आवेदन लंबित हैं और नए उद्योगों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहने से स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
पर्यावरण संरक्षण पर चिंता
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों में किसी भी तरह की ढील का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फिरोजाबाद क्षेत्र में पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियों के बावजूद उद्योगों को अनुमति दी गई थी। इस पर CJI ने कहा कि “रोकथाम संबंधी उपायों के साथ कोई व्यावहारिक समाधान निकालना होगा।” उन्होंने संकेत दिया कि इस बात पर व्यापक सहमति है कि TTZ में केवल गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को ही अनुमति मिलनी चाहिए।
10,400 वर्ग किमी क्षेत्र में लागू हैं पर्यावरणीय पाबंदियां
गौरतलब है कि 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैले ताज ट्रेपेजियम ज़ोन में ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1996 से कड़े प्रतिबंध लागू कर रखे हैं।(साभार एजेंसी)
