(नई दिल्ली)17अगस्त,2026.
जनगणना 2027 का पहला चरण सोमवार 17 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है।इसकी शुरुआत लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश अ उत्तराखंड के बर्फबारी और विषम परिस्थितियों वाले दुर्गम इलाकों से होगी। डिजिटल माध्यम से होने वाले इस डिजिटल सेंसस (जनगणना) में देश के नागरिकों को इतिहास में पहली बार ‘सेल्फ-न्यूमरेशन’ की सुविधा दी गई है।
17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 के बीच इन चिन्हित दुर्गम क्षेत्रों के निवासी आधिकारिक पोर्टल
(https://se.census.gov.in पर
अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं
घर-घर जाकर होगा सत्यापन:
इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर सत्यापन और डेटा संग्रह की प्रक्रिया पूरी करेंगे। देश के बाकी मैदानी और सामान्य इलाकों में जनगणना का काम फरवरी 2027 में शुरू होगा।
लद्दाख और जम्मू-कश्मीर:15,000 फीट की ऊंचाई पर भी होगा सर्वे
लद्दाख के 7 जिलों में लगभग 2.74 लाख लोग और जम्मू-कश्मीर के 16 जिलों में करीब 88.1 लाख लोग इस advance चरण में कवर होंगे। ज़ांस्कर, लेह के 11 लोगों वाले यिंगचेन गांव और 15,000 फीट की ऊंचाई पर बसे चांगथांग के हानले गांव तक जनगणना टीम पहुंचेगी।
लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए कहा, “बर्फबारी वाले इलाकों में मोबाइल ऐप के जरिए पूरी जनगणना की जाएंगी।”
लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए कहा, “बर्फबारी वाले इलाकों में मोबाइल ऐप के जरिए पूरी तरह से पेपर-लेस जनगणना होगी। दुर्गम (सेना और ITBP) की उपस्थिति वाले स्थानों के लिए विशेष चार्ज अधिकारी तैनात किए गए हैं। अगर किसी दुर्गम चोटी पर एक ही परिवार रहता है, तो भी हमारे कर्मचारी वहां तक पहुंचेंगे और डेटा दर्ज करेंगे।”
उत्तराखंडःअसैन्य और सैन्य क्षेत्रों की अलग व्यवस्था
उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों के 131 गांवों और गंगोत्री, बद्रीनाथ व केदारनाथ धाम क्षेत्रों करीब 52,000 लोग कवर होंगे।
उत्तराखंड जनगणना निदेशक इवा श्रीवास्तव ने सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बात करते हुए कहा, “सुरक्षा कारणों से सैन्य और अर्धसैनिक बलों की यूनिट्स में जनसंख्या गणना कागजी (पेपर) मोड पर की जाएगी। बाद में इस डेटा को विशेष चार्ज अधिकारियों के कार्यालयों में डिजिटली दर्ज किया जाएगा।”
40 सवाल और जातिगत जनगणना का नया प्रावधान:
इस बार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा 40 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो 2011 की जनगणना से 11 अधिक हैं। पहली बार खुले प्रारूप में जाति से जुड़ा प्रश्न (प्रश्न संख्या 10) भी शामिल किया गया है, जिसके तहत नागरिक द्वारा बताई गई जाति को बिना किसी पूर्व-निर्धारित सूची के सीधे दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा माता-पिता का विवरण, स्थायी पता और नागरिक पहचान दस्तावेजों से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए गए हैं।(साभार एजेंसी)
