भूजल इस्तेमालकर्ता,30नवंबर तक फीस में छूट

Hariyana

(चंडीगढ़,हरियाणा)24अक्टूबर,2026

हरियाणा राज्य सरकार ने हरियाणा में जमीन से पानी निकालकर इस्तेमाल करने वाले उद्योगों, खनन कंपनियों और बड़ी निर्माण परियोजनाओं को सरकार ने राहत दी है। अब ऐसी परियोजनाएं 30 नवंबर 2026 तक भूजल इस्तेमाल की मंजूरी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के लिए आवेदन कर सकेंगी और उन्हें लेट फीस में विशेष छूट मिलेगी। इसका मकसद उन परियोजनाओं को नियमों के दायरे में लाना है, जिन्होंने अब तक भूजल निकालने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली है।

हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण ने यह फैसला भूजल संरक्षण और उसके सही इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लिया है। प्राधिकरण के अनुसार, यह छूट उद्योगों, बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं और खनन कार्यों के लिए लागू होगी।

हरियाणा में नियमों के मुताबिक, औद्योगिक इकाइयों, निर्माण परियोजनाओं और खनन कार्यों के लिए जमीन के नीचे से पानी निकालने से पहले प्राधिकरण से एनओसी लेना जरूरी है। आसान शब्दों में कहें तो कोई कंपनी या परियोजना संचालक अपनी जरूरत के लिए बोरवेल या अन्य माध्यम से भूजल निकालता है, तो उसे पहले निर्धारित नियमों के तहत अनुमति लेनी होगी।

सरकार ने अब आवेदन करने वालों को लेट फीस में छूट देकर नियमों का पालन करने का अवसर दिया है। इसके लिए संबंधित लोगों को प्राधिकरण के आधिकारिक पोर्टल hwra.org.in पर आवेदन करना होगा। प्राधिकरण ने साफ किया कि लेट फीस में छूट का लाभ 30 नवंबर 2026 तक ही मिलेगा।

इसके बाद यानी एक दिसंबर से मौजूदा नियमों के अनुसार लेट फीस वसूली जाएगी। निर्धारित समय में जरूरी एनओसी नहीं लेने या नियमों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में संबंधित उद्योगों और परियोजना संचालकों के लिए समय रहते आवेदन करना जरूरी है। इस फैसले का उद्देश्य केवल शुल्क में राहत देना नहीं, बल्कि भूजल का इस्तेमाल करने वालों को नियमों के दायरे में लाना भी है।

भूजल की एनओसी के लिए एक लाख रुपये लेट फीस:
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूजल की एनओसी लेने के लिए सामान्य आवेदन शुल्क के अलावा एक लाख रुपये लेट फीस का प्रविधान है। निर्धारित समय के बाद आवेदन करने पर एक लाख रुपये लेट फीस के साथ श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क देना होता है।

आवेदन शुल्क परियोजना की श्रेणी और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित है। इसकी एक समान दर सभी परियोजनाओं पर लागू नहीं होती। एनओसी के लिए आवेदन शुल्क और लेट फीस के अलावा भूजल की मात्रा के आधार पर टैरिफ तथा सुरक्षा राशि भी देनी पड़ सकती है।(साभार एजेंसी)

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