अब सड़े-गले टमाटर से बनेंगे हैंडवाॅश और डिटर्जेंट पाउडर, IIVR ने तैयार किया फॉर्मूला

Uttar Pradesh

(वाराणसी UP) 18फरवरी,2025.

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने खास तकनीक तैयार की है। इसमें सड़े-गले टमाटर, खीरा, करेला सहित अन्य सब्जियों के उपयोग होंगे। तनों से मुर्गियों के लिए चारा भी बनाए जाएं।

टमाटर, खीरा, करैला, हल्दी सहित मुल्तानी मिट्टी के योग से हैंडवास, डिटर्जेंट पाउडर और टमाटर के तने से मुर्गियों के पोषक युक्त चारा भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया। वैज्ञानिकों को टमाटर से बने इन उत्पादों को बनाने का विचार वैज्ञानिकों को सीजन में किसानों के टमाटर के बर्बाद होने की समस्या देखकर आया।

चार साल के शोध के वैज्ञानिकों ने फार्मूला बनाने में सफलता पाई है। जिसके प्रमाणीकरण के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई। अभी तक सीजन में टमाटर के अधिक उत्पादन होने पर किसानों को बाजार में अच्छे भाव नहीं मिलते थे जिससे उनका लागत खर्च तक नहीं निकल पाती थी। ऐसे में टमाटर से प्यूरी और सॉस बनाने के अलावा किसानों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

ज्यादातर किसानों फसल बर्बाद हो जाती थी। लेकिन आने वाले दिनों में किसानों फसल बर्बाद नहीं होगी। ये दावा किया है आईआईवीआर के निदेशक डॉ. नागेंद्र राय ने उन्होने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने चार साल के शोध के बाद टमाटर जूस और बाकी अवशेष में हल्दी, मुल्तानी, करेला का रस सहित अन्य माइक्रोन्यूटेंट के मिश्रण से हैडवास, डिटर्जेंट पाउडर बनाने की तकनीक विकसित की है।

इसके आलावा टमाटर पौध के तना, खीरा के प्रयोग से डी कंपोजर और मुर्गियों के लिए चारे का निर्माण किया है। जिसके प्रयोग से पोलट्री फार्म की मुर्गियों के अंडे देने की क्षमता में तेजी से विकास होता है।

निदेशक के बताया चार साल के शोध के बाद अभी टमाटर, हल्दी, करैला, खीरा के प्रयोग से डिटर्जेंट पाउडर और हैंडवास बनाने में सफलता मिली है। जल्द ही फार्मूलों को लाइसेंस की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा मसरूम के पाउडर से भी कई उत्पाद बनाने पर काम किया जा रही है।(साभार एजेंसी)

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