(लखनऊ,UP)16अगस्त,2025.
रोते हैं सब खास-ओ-आम चेहल्लुम हुआ तमाम, चले आओ ए जव्वारो चले आओ, मेरी आवाज पे लब्बैक पुकारे जाओ…। उठ गए सब ताजिये वीरान अजाखाने हुए, हो गया चेहल्लुम तेरा ए शाहे बेसर अलविदा…। हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों के चालीसवें पर शुक्रवार को चेहल्लुम का जुलूस निकला तो अजादारों ने नम आंखों से शहीदों को पुरसा दिया। दर्द भरे नौहों और या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के साथ अजादार नंगे पांव जुलूस में साथ हो लिए। जुलूस में शामिल मातमी अंजुमने अपने अलम के साथ मातम करती हुई शामिल थीं।
कर्बला के शहीदों के चेहल्लुम के जुलूस में शामिल होने के लिए अंजुमनें व अजादार बड़ी तादात में सुबह से ही विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित इमामबाड़ा नाजिम साहब पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर में इमामबाड़े में इमाम ए जुमा मौलाना कल्बे जवाद नकवी के बेटे मौलाना कल्बे अहमद ने मजलिस को खिताब किया। मजलिस के बाद इमामबाड़े से मातमी अंजुमन के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। जुलूस में सबसे आगे हजरत अब्बास का परचम था। इसके साए में अंजुमन मजलूमिया, गुंचा ए मजलूमिया, अब्बासिया, काजमिया आब्दिया, शहीदाने कर्बला, रौनक ए दीने इस्लाम सहित शहर की तमाम अंजुमनें नौहाख्वानी करती हुई जुलूस में बढ़ चलीं। अंजुमनों के मातमदार जंजीर, कमा व सीनाजनी कर कर्बला के शहीदों को अपने खून से पुरसा दे रहे थे। इसके पीछे कर्बला के शहीदों के शबीह ए ताबूत और ऊंटो पर अमारियां शामिल थीं। इसके अलावा जुलूस में हजरत अब्बास की निशानी अलम, हजरत इमाम हुसैन के छ माह के बेटे हजरत अली असगर का गहवारा और हजरत इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह भी साथ-साथ था। जुलूस में इस बार भी करीब एक क्विंटल ड्राई फ्रूट से बना अलम शामिल था। अजादारों ने इन तबर्रुकात की जियारत कर दुआएं मांगी। जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से नक्खास चौराहा, टूरियागंज, हैदरगंज, बुलाकी अडडा, एवरेडी चौराहा होते हुए देर शाम तालकटोरा कर्बला पहुंच कर संपन्न हुआ।
कर्बला के शहीदों का गम में निकली अरबाईन वाक:
कर्बला के शहीदों के चालीसवें पर शुक्रवार को ईराक की तर्ज पर राजधानी लखनऊ में भी अजादारों ने अरबा ईन वाक में शामिल होकर शहीदों का गम मनाया। राजधानी के बीकेटी स्थित कर्बला ए अब्बासिया व हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ से अरबाईन वाक निकाली गई। कर्बला तालकटोरा के लिए निकले अरबाईन वाक में सैकड़ों की तादात में काले लिबास में अजादार शामिल हुए। दरअसल ईराक के कर्बला में हर साल चेहल्लुम के दिन अरबाईन वाक का आयोजन होता है। इसमें दुनियां भर से लाखों अकीदतमंद शामिल होते हैं। अकीदतमंद नजफ से कर्बला तक करीब 80 किमी का रास्ता पैदल तय कर कर्बला पहुंचते हैं।
जुलूस के रास्ते में लगीं सबील:
कर्बला के प्यासों की याद में जुलूस के रास्ते में अंजुमनों ने अजादारों के लिए सबील लगाई। विक्टोरिया स्ट्रीट से कर्बला तालकटोरा तक लगी सबीलों पर फल, चाय और पानी के साथ अन्य खाने पीने की चीजें वितरित की जाती रहीं। वहीं, अरबाईन वाक के रास्ते शहीद स्मारक के पास भी सबील लगाई गई।
कर्बला के शहीदों की दिलाई नज्र:
चेहल्लुम के मौके पर अजादारों ने अपने घरों में हजरत इमाम हुसैन सहित कर्बला के 72 शहीदों की नज्र दिलाकर उन्हें पुरसा दिया गया। वहीं शहर के तमाम अजाखानों में शहीदों के चेहल्लुम की मजलिस व नज्र दिलाकर खिराजे अकीदत पेश की गई।
सुन्नी समुदाय ने दिया कर्बला के शहीदों को पुरसा:
सुन्नी समुदाय ने भी कर्बला के शहीदों के चालीसवें पर शहीदों को पुरसा दिया। गम ए हुसैन में डूबे सुन्नी समुदाय के अजादरों ने शहर के तमाम इलाकों की कर्बला में ताजियों को दफन किया और घरों में नज्र का आयोजन कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।(साभार एजेंसी
