(अजमेर,राजस्थान)13सितम्बर,2025.
आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या रविवार को देव पितृ अमावस्या पर खंड ग्रास सूर्य ग्रहण रहेगा।भारतीय समय से यह ग्रहण रात्रि 11 बजे से प्रारंभ होकर मध्य रात्रि 1 बजकर 12 मिनट तक मध्य और इसके बाद सूर्य ग्रहण का प्रभाव रात्रि 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. सूर्य ग्रहण 4 घंटे 24 मिनट तक प्रभावी रहेगा। खास बात यह है कि सूर्य ग्रहण भारत को प्रभावित नहीं करेगा. यहां यम नियम सूतक मान्य नहीं होंगे, यानी विदेशों में सूर्य ग्रहण रात्रि में होगा।ऐसे में भारत में सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म करने में कोई बाधा नहीं है।
एक पखवाड़े में चन्द्र और सूर्य ग्रहण के साथ ही पितृ पक्ष की तिथियों का घटना नहीं है शुभ सूचक : पुष्कर में ज्योतिष पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि सूर्य ग्रहण का असर न्यूजीलैंड, पूर्वी मेलनेसिया, दक्षिण पोलेसिया, पश्चिम अंटार्कटिका, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में पूर्ण प्रभावी रहेगा।यहां सूर्य ग्रहण रात्रि को 4 घंटे 24 मिनट तक रहेगा, जो बड़ा सूर्य ग्रहण है। विगत एक पखवाड़े में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण के होने से देश और विदेश में आर्थिक और राजनीतिक हालात विकट होंगे. इसके अलावा कृषि, उद्योग, इंजीनियरिंग शिक्षा एवं प्राकृतिक मौसम पर भी इसका असर रहेगा।
इसके अलावा यह ग्रहण उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रभाव में रहेगा। साथ ही कन्या राशि पर विशेष अशुभ सूचक है. पितृपक्ष में सप्तमी तिथि का क्षय होना, 16 दिन के श्राद्ध 15 दिन में परिपूर्ण होना, यह जनमानस के लिए पितृ प्रकोप के रूप में देखा जाता है, जो सुखद नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि नवरात्रि की वृद्धि में शक्ति की आराधना से राहत के संकेत मिल रहे है. यानी नवरात्रि पर शक्ति की आराधना से राहत मिल सकती है।
पंडित शर्मा ने बताया कि विदेश में सूर्य ग्रहण रात्रि में होने से सर्व पितृ अमावस्या पर इसका कोई प्रभाव भारत में दिन में सूर्य उदय के समय से नहीं रहेगा. लिहाजा तीर्थ, नदियों, समुद्र एवं पवित्र जलाशय ब्रह्म सरोवर में पितरों की आत्मिक शांति, मोक्ष गति और बैकुंठ प्राप्ति के लिए श्राद्ध कर्म करना शुभ दायक है। उन्होंने बताया कि श्राद्ध कर्म में नारायण बलि, पिंडदान, तर्पण, दान पुण्य, हवन पूजन करने से अक्षय गुना फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा वृक्ष लगाने, गोदान करने का भी शुभ योग है।
सर्व पितृ अमावस्या है विशेष : पंडित शर्मा ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म करने के लिए विशेष मानी जाती है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु की तिथि, वार, महीना ज्ञात नही है वे लोग भी अपने पितरों की शांति के लिए सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं. इस दिन दान-पुण्य करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देकर वापस धरती से लौटते हैं।(साभार एजेंसी)
