ज्यादा “स्क्रीन टाइम” बढ़ा सकता है‌‌ अवसाद

UP / Uttarakhand


(लखनऊ,UP)15अप्रैल,2026

अवसाद केवल जैविक या मनोवैज्ञानिक विकार नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक और डिजिटल व्यवहार से भी गहराई से जुड़ा है। केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के अध्ययन में सामने आया है कि अवसाद के इलाज में डिजिटल स्वच्छता का पालन अनिवार्य है। मोबाइल, लैपटॉप की स्क्रीन से दूरी जरूरी है।

डॉ.शुभ्रा पांडेय, डॉ.पवन कुमार गुप्ता और डॉ. सुजीत कुमार के अध्ययन में 18 से 60 वर्ष के 140 मरीजों को शामिल किया गया। इनमें से 70 अवसाद के सक्रिय मरीज थे और बाकी इलाज के बाद कम लक्षण वाले थे। उपचार के बाद बेहतर हुए मरीजों में सामाजिक जुड़ाव और अपनों का समर्थन काफी अधिक दिखा। सक्रिय मरीजों में इसकी भारी कमी मिली।

ज्यादा मिला सोशल मीडिया का इस्तेमाल:
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि अवसाद के गंभीर लक्षणों वाले 33 फीसदी मरीज रोजाना चार घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया या स्क्रीन पर बिताते हैं। ठीक हो चुके मरीजों में इसका इस्तेमाल का प्रतिशत 14 ही मिला।

अध्ययन के अनुसार, जो मरीज समस्याओं से मुकाबला करने की रणनीति अपनाते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण और सोशल मीडिया की लत कम मिली।

केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के डॉ. पवन कुमार गुप्ता का कहना है कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है। सोशल मीडिया और स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताना हमारी मानसिक स्थिति को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके इस्तेमाल को सीमित करने की जरूरत है।

अपनाएं ये कदम:

  • स्क्रीन टाइम के लिए समय निश्चित करें।
  • सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी डिजिटल स्क्रीन बंद कर दें।
  • भोजन करते समय परिवार के साथ बिना स्क्रीन के समय बिताने की आदत डालें।
  • बच्चों के लिए स्क्रीन के इस्तेमाल के नियम बनाकर पालन कराएं।
  • किताबें पढ़ने या अन्य शौक में समय लगाएं।
  • डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास करें और अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें।
  • हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। यह आंखों के तनाव को कम करने में सहायक होगा व एकाग्रता बढ़ाएगा।(साभार एजेंसी)

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