AI से शातिरों को पकड़ेगी पंजाब पुलिस

Punjab

(चंडीगढ़,पंजाब)03मई,2026.

अपराधियों की धरपकड़ के लिए अब उनकी आवाजों के सैंपल बड़े मददगार बनेंगे। पंजाब पुलिस ने अभी तक 84 अपराधियों की आवाजों का ‘वॉयस बैंक’ तैयार किया है। इसके अलावा 3.90 लाख से अधिक अपराधियों का विस्तृत डेटाबेस भी जुटाया है।

पंजाब पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस) के तहत एक आधुनिक वॉयस रिकग्निशन सिस्टम से लैस हो गई है। यह प्रणाली विदेशों से संचालित हो रहे गैंग नेटवर्क में घुसपैठ करने और पंजाब के युवाओं को अवैध गतिविधियों की ओर भटकाने वाले तत्वों तक पहुंच बनाने में सहायक साबित होगी। इस सिस्टम में 84,000 से अधिक अपराधियों और संदिग्धों की आवाजों का एक वॉयस बैंक तैयार किया गया है।

अपराधियों के डेटाबेस में उनकी गैंग संबंधी जानकारियां और फोनेटिक सर्च जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसका उन्नत ‘गैंग ट्री सर्च’ टूल संगठित अपराधी नेटवर्क की पूरी संरचना को दृश्य रूप में प्रदर्शित करता है, जिससे स्थानीय अपराधों से लेकर उनके अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सकता है। पंजाब से संबंधित 60 खतरनाक गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, इटली सहित अन्य देशों से सक्रिय हैं। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडीजीपी प्रमोद बान ने बताया, कई वर्षों से विदेशों में बैठे गैंगस्टर तकनीक का दुरुपयोग करते हुए सुरक्षित ठिकानों से रंगदारी का धंधा चला रहे थे।

पीएआईएस की मदद से अपराध से निपटने की हमारी क्षमता काफी बढ़ गई है। एआई आधारित वॉयस मैचिंग हमें कुछ ही मिनटों में कॉलर की पहचान करने में सक्षम बनाती है, जिससे हम तेज और सटीक कार्रवाई कर सकते हैं। एडीजीपी बान ने बताया कि यह एआई सिस्टम अधिकारियों को अपराध होने से पहले ही उसे रोकने में भी मदद करता है। हालिया कार्रवाइयों में विदेशी हैंडलरों और स्थानीय सहयोगियों के बीच डिजिटल संचार को ट्रैक करके लक्षित हत्याओं की साजिशों को समय रहते नाकाम किया गया है।

फंडिंग का भी मालूम चल रहा
इस सिस्टम से पुलिस को यह भी मालूम चल रहा है कि कौन हैंडलर किस गैंग को फंडिंग कर रहा है, कौन सहायता कर रहा है और कौन कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। एडीजीपी बान कहते हैं कि यह इंटेलिजेंस आधारित रवैया सिर्फ किसी आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पूरे नेटवर्क को तोड़ने में मदद कर रहा है। उनके अनुसार इस तकनीक ने पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) को पूरे नेटवर्क के खात्मे के लिए सक्षम बनाया है।

रियल-टाइम इंटेलिजेंस से लैस
एडीजीपी प्रमोद बान ने बताया कि मजबूत किए गए फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल अब पीएआईएस से मिलने वाली रियल-टाइम इंटेलिजेंस से लैस हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ा है और विदेशों में छिपे अपराधियों को वापस लाने की क्षमता मजबूत हुई है। अब हम खतरे की पहचान कर सकते हैं, बातचीत को ट्रैक कर सकते हैं और अपराध होने से पहले ही कार्रवाई कर सकते हैं।(अपराधियों की धरपकड़ के लिए अब उनकी आवाजों के सैंपल बड़े मददगार बनेंगे। पंजाब पुलिस ने अभी तक 84 अपराधियों की आवाजों का ‘वॉयस बैंक’ तैयार किया है। इसके अलावा 3.90 लाख से अधिक अपराधियों का विस्तृत डेटाबेस भी जुटाया है।

पंजाब पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस) के तहत एक आधुनिक वॉयस रिकग्निशन सिस्टम से लैस हो गई है। यह प्रणाली विदेशों से संचालित हो रहे गैंग नेटवर्क में घुसपैठ करने और पंजाब के युवाओं को अवैध गतिविधियों की ओर भटकाने वाले तत्वों तक पहुंच बनाने में सहायक साबित होगी। इस सिस्टम में 84,000 से अधिक अपराधियों और संदिग्धों की आवाजों का एक वॉयस बैंक तैयार किया गया है।

अपराधियों के डेटाबेस में उनकी गैंग संबंधी जानकारियां और फोनेटिक सर्च जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसका उन्नत ‘गैंग ट्री सर्च’ टूल संगठित अपराधी नेटवर्क की पूरी संरचना को दृश्य रूप में प्रदर्शित करता है, जिससे स्थानीय अपराधों से लेकर उनके अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सकता है। पंजाब से संबंधित 60 खतरनाक गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, इटली सहित अन्य देशों से सक्रिय हैं। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडीजीपी प्रमोद बान ने बताया, कई वर्षों से विदेशों में बैठे गैंगस्टर तकनीक का दुरुपयोग करते हुए सुरक्षित ठिकानों से रंगदारी का धंधा चला रहे थे।

पीएआईएस की मदद से अपराध से निपटने की हमारी क्षमता काफी बढ़ गई है। एआई आधारित वॉयस मैचिंग हमें कुछ ही मिनटों में कॉलर की पहचान करने में सक्षम बनाती है, जिससे हम तेज और सटीक कार्रवाई कर सकते हैं। एडीजीपी बान ने बताया कि यह एआई सिस्टम अधिकारियों को अपराध होने से पहले ही उसे रोकने में भी मदद करता है। हालिया कार्रवाइयों में विदेशी हैंडलरों और स्थानीय सहयोगियों के बीच डिजिटल संचार को ट्रैक करके लक्षित हत्याओं की साजिशों को समय रहते नाकाम किया गया है।

रियल-टाइम इंटेलिजेंस से लैस
एडीजीपी प्रमोद बान ने बताया कि मजबूत किए गए फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल अब पीएआईएस से मिलने वाली रियल-टाइम इंटेलिजेंस से लैस हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ा है और विदेशों में छिपे अपराधियों को वापस लाने की क्षमता मजबूत हुई है। अब हम खतरे की पहचान कर सकते हैं, बातचीत को ट्रैक कर सकते हैं और अपराध होने से पहले ही कार्रवाई कर सकते हैं।(साभार एजेंसी)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *